ऑक्सफैम ने सत्ता के लोकतंत्रीकरण के लिए भारतीय आरक्षण प्रणाली की मिसाल दी

ऑक्सफैम ने सत्ता के लोकतंत्रीकरण के लिए भारतीय आरक्षण प्रणाली की मिसाल दी

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  • Publish Date - January 19, 2026 / 10:34 AM IST,
    Updated On - January 19, 2026 / 10:34 AM IST

(वरुण झा)

दावोस, 19 जनवरी (भाषा) मानवाधिकार समूह ऑक्सफैम ने वैश्विक स्तर पर अरबपतियों के राजनीतिक परिदृश्य पर कब्जा करने की आशंका जताते हुए सोमवार को भारत की आरक्षण प्रणाली को आम लोगों को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में प्रगति की एक ‘‘मजबूत’’ मिसाल बताया।

विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के पहले दिन ऑक्सफैम इंटरनेशनल ने अपनी वार्षिक असमानता रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि आम नागरिकों की तुलना में अरबपतियों के राजनीतिक पद संभालने की संभावना 4,000 गुना अधिक है।

‘बहुसंख्यक शक्ति’ के निर्माण की वकालत करते हुए ऑक्सफैम ने कहा कि आम लोग एक ऐसी राजनीतिक व्यवस्था में शक्तिशाली बनते हैं जहां राजनीतिक, संस्थागत एवं सामाजिक परिस्थितियां संरचनात्मक असमानता के बावजूद निर्णय लेने की प्रक्रिया को प्रभावित करने की उनकी क्षमता को बढ़ाती हैं।

ऑक्सफैम ने ‘अमीरों के शासन का प्रतिरोध: अरबपतियों की सत्ता से स्वतंत्रता की रक्षा’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा, ‘‘ ऐसा तब होता है जब संस्थागत समावेशिता, जवाबदेही के लिए राजनीतिक प्रोत्साहन, सामूहिक संगठन, प्रभावी शासन और वैचारिक प्रतिबद्धताएं एक साथ मिलती हैं।’’

इसमें कहा गया, ‘‘ नागरिक समाज संगठन, जमीनी स्तर के आंदोलन और श्रम संघ जैसे गैर-सरकारी संगठन, अल्पप्रतिनिधित्व वाले समुदायों की राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने और नीति निर्माण में सभी की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने में देशों के स्वाभाविक सहयोगी हैं।’’

इसमें कहा गया है कि इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रगति के कुछ ठोस उदाहरण मौजूद हैं।

ऑक्सफैम ने कहा, ‘‘ उदाहरण के लिए, भारत में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य हाशिए पर पड़े समूहों के लिए राजनीतिक आरक्षण (कोटा) आर्थिक रूप से वंचित एवं सामाजिक रूप से बहिष्कृत समुदायों को विधायी प्रतिनिधित्व प्राप्त करने तथा पुनर्वितरण नीतियों को आगे बढ़ाने के अवसर प्रदान करता है।’’

भारत में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के साथ-साथ कुछ अन्य वर्गों के लिए भी विधानसभाओं में जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिया जाता है, जबकि हाल ही में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की गई है। इन श्रेणियों के अलावा, शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में अन्य कमजोर तथा हाशिए पर स्थित समूहों के लिए भी आरक्षण है।

ऑक्सफैम ने ब्राजील की सहभागी बजट प्रणाली का उदाहरण भी दिया जो 1990 के दशक में शुरू हुई और 2000 के दशक में इसका काफी विस्तार हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया कि सरकारों को अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचों, मानकों एवं दिशा-निर्देशों के अनुरूप एक ऐसा नागरिक वातावरण सुनिश्चित करना चाहिए जो नागरिकों की राजनीतिक शक्ति को बढ़ा सके।

ऑक्सफैम ने सरकारों से सार्वजनिक रूप से प्रतिबद्धता जताने तथा नागरिकों, आंदोलनों, पत्रकारों एवं संगठनों के लिए, सभा तथा संगठन (ऑनलाइन सहित) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा और बढ़ावा देने के लिए कार्रवाई करने का आह्वान किया है ताकि वे संगठित हो सकें, अपनी बात रख सकें और विरोध कर सकें।

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा