विमान ईंधन के दाम स्थिर बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का कोष, एयरलाइन कंपनियों को मिलेगी राहत

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विमान ईंधन के दाम स्थिर बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का कोष, एयरलाइन कंपनियों को मिलेगी राहत

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  • Publish Date - June 3, 2026 / 09:57 PM IST,
    Updated On - June 3, 2026 / 09:57 PM IST

नयी दिल्ली, तीन जून (भाषा) केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमत स्थिर बनाये रखने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के कोष की मंजूरी दी। इस पहल का उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र की खुदरा पेट्रोलियम कंपनियों को वित्तीय सहायता प्रदान करना है ताकि एटीएफ की कीमतों को काबू में रखा जा सके और पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण ईंधन की बढ़ती लागत से एयरलाइन कंपनियों को राहत मिल सके।

आधिकारिक बयान के अनुसार, इस योजना के तहत सरकारी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ओएमसी) को 10,000 करोड़ रुपये तक का ब्याज-मुक्त कर्ज दिया जाएगा। इससे वे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अनुसूचित भारतीय एयरलाइंस को स्थिर कीमत पर एटीएफ की आपूर्ति कर सकेंगी।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार ने घरेलू एयरलाइन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमत 75.6 रुपये प्रति लीटर तय कर दी है, जो मौजूदा बाजार मूल्य से काफी कम है।

हालांकि, इस सीमा से एयरलाइन कंपनियों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन इससे रिफाइनरी और खुदरा ईंधन विक्रेताओं पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है। इसकी भरपाई स्थिरीकरण कोष के माध्यम से की जाएगी।

इस सहायता की घोषणा ऐसे समय की गई है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमत मई में बढ़कर लगभग 142 रुपये प्रति लीटर हो गई जबकि मार्च में यह 60.50 रुपये प्रति लीटर थी। इससे विमानन कंपनियों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है।

एयरलाइंस में ईंधन खर्च परिचालन लागत का लगभग 40 प्रतिशत और कुछ मामलों में अत्यधिक अस्थिरता के समय 60 प्रतिशत तक होता है।

इस व्यवस्था के तहत, पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को उस स्थिति में क्षतिपूर्ति दी जाएगी जब अंतरराष्ट्रीय आयात समता मूल्य सरकार द्वारा स्वीकृत प्रणाली के तहत निर्धारित मानक स्तर से अधिक हो जाएगा। वैश्विक ईंधन कीमतों में नरमी आने पर तेल कंपनियों को दी गई सहायता वापस ले ली जाएगी और एक निर्धारित समायोजन प्रक्रिया के माध्यम से प्राप्त राशि को भारत की संचित निधि में वापस कर दिया जाएगा।

एटीएफ मूल्य स्थिरीकरण सहायता तीन साल की अवधि के लिए अमल में रहेगी। यह वार्षिक समीक्षा या दी गयी राशि की पूरी वसूली होने तक, जो भी पहले हो, पर निर्भर है।

नागर विमानन और पेट्रोलियम मंत्रालयों की देखरेख में ईंधन खुदरा विक्रेताओं के साथ हस्ताक्षरित समझौतों के तहत, योजना में भाग लेने वाली एयरलाइन कंपनियों को केवल पेट्रोलियम विपणन कंपनियों से ही एटीएफ खरीदना होगा।

वैष्णव ने कहा कि यह योजना एयरलाइन परिचालन लागत को स्थिर करने, यात्रियों के लिए किराये में उतार-चढ़ाव को कम करने और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने में मदद करेगी।

अधिकारियों ने यह भी कहा कि यह कदम क्षेत्रीय हवाई सेवाओं को भी समर्थन देगा।

यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब भारतीय विमानन कंपनियों को ईंधन की बढ़ती कीमतों और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र को बंद करने के कारण लंबे अंतरराष्ट्रीय उड़ान मार्गों के कारण परिचालन लागत में वृद्धि का सामना करना पड़ रहा है। इन वैकल्पिक मार्गों के कारण यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया जाने वाली उड़ानों में ईंधन की खपत बढ़ गई है, जिससे परिचालन लागत में वृद्धि हुई है और कुछ लंबी दूरी के मार्गों पर मांग कमजोर हुई है।

नागर विमानन और पेट्रोलियम मंत्रालयों तथा व्यय विभाग के प्रतिनिधियों वाली एक निगरानी समिति योजना के कार्यान्वयन, दावों के सत्यापन और निपटान पर नजर रखेगी। सभी लेनदेन लेखापरीक्षा के अधीन होंगे।

यह योजना क्षेत्रीय और छोटे शहरों सहित घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क को बनाए रखने में मदद करेगी। साथ ही विमानन, पर्यटन, होटल, लॉजिस्टिक और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार को भी समर्थन देगी।

वैष्णव ने कहा कि यह कोष अनुसूचित भारतीय एयरलाइन के लिए एटीएफ की कीमतों को स्थिर करने और एयरलाइन संचालन को व्यावहारिक बनाये रखने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि इस कोष के माध्यम से, जब तक संकट बना रहेगा, एयरलाइन कंपनियों को एटीएफ स्थिर कीमत पर मिलेगा। संकट समाप्त होने के बाद, भाग लेने वाली एयरलाइंस को यह राशि वापस करनी होगी।

मंत्री के अनुसार, यह कोष वैश्विक तेल की कीमतों में उछाल के कारण किराये में होने वाली वृद्धि से हवाई यात्रियों की रक्षा करेगा। साथ ही विमानन प्रणाली पर निर्भर 77 लाख नौकरियों की भी बनाये रखेगा।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह बजटीय सहायता पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की अनुदान मांगों के माध्यम से पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को ब्याज-मुक्त कर्ज के रूप में दी जाएगी।

पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन की कीमतों में अस्थिरता के इस दौर में, विमानन कंपनियों के लिए स्थिर एटीएफ मूल्य सुनिश्चित करने के लिए तेल विपणन कंपनियों को सहायता प्रदान की जाएगी।

बयान के अनुसार, जब भी आयात समता मूल्य स्वीकृत व्यवस्था के तहत निर्धारित मानक कीमत से अधिक होगा, यह कोष पेट्रोलियम विपणन कंपनियों को बढ़े हुए अंतरराष्ट्रीय एटीएफ मूल्यों से होने वाले नुकसान की भरपाई करेगा।

इसमें कहा गया, ‘‘अंतरराष्ट्रीय एटीएफ की कीमतों में नरमी आने पर, राशि में जो अंतर आएगी, वह पेट्रोलियम विपणन कंपनियों से ली जाएगी और भारत की संचित निधि में वापस कर दी जाएगी। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक कि पूरी सहायता राशि वसूल नहीं हो जाती और उसका निपटान नहीं हो जाता।’’

वैष्णव ने कहा कि यह कोष हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक निवेश की सुरक्षा में मदद करेगा। इससे हवाई संचालन व्यावहारिक बना रहेगा और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने के बीच यूरोप, उत्तरी अमेरिका और पश्चिम एशिया से हवाई संपर्क जारी रहेगा।

पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण भारतीय एयरलाइंस अब अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबे मार्गों का उपयोग कर रही हैं। इससे पिछले वर्ष की शुरुआत से ईंधन की खपत बढ़ गई है।

घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ की कीमत की सीमा तय की गई है, लेकिन भारतीय एयरलाइंस अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए आयात समता मूल्य पर ईंधन खरीदना जारी रखे हुए हैं, जिससे उन्हें ईंधन की ऊंची लागत का सामना करना पड़ रहा है।

बयान में कहा गया है कि हालांकि, एटीएफ की कीमतों पर सीमा लगाना एक अस्थायी उपाय है और पेट्रोलियम विपणन कंपनियों के लिए दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ नहीं है। पश्चिम एशिया संकट के दौरान एटीएफ की अस्थिर और बढ़ती कीमतों के कारण विमान ईंधन के मूल्य पर सीमा लगाने के कारण तेल कंपनियों को नुकसान भी हो रहा है।

विमानन कंपनी इंडिगो ने कहा कि यह समय पर उठाया गया स्वागत योग्य राहत भरा कदम है। यह लोगों की आवाजाही और आर्थिक वृद्धि के लिहाज से विमानन क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति सरकार की समझ को बताता है।

भाषा रमण अजय

अजय