सियासत का कोयला गर्म… ‘केंद्र’ का क्या धर्म? क्या केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों का हक मार रही है?

सियासत का कोयला गर्म... 'केंद्र' का क्या धर्म? central government has refused to give coal royalty of Chhattisgarh's share

सियासत का कोयला गर्म… ‘केंद्र’ का क्या धर्म? क्या केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों का हक मार रही है?
Modified Date: December 22, 2022 / 12:06 am IST
Published Date: December 22, 2022 12:06 am IST

रायपुर/सौरभ सिंह परिहार : केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के हिस्से की कोल रॉयल्टी देने से इनकार कर दिया है। इससे एक ओर जहां छत्तीसगढ़ी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं तो दूसरी तरफ केंद्र और राज्य के बीच टकराव और बढ़ता दिख रहा है। सवाल ये कि क्या केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के लोगों का हक मार रही है और अब राज्य सरकार के पास क्या रास्ता बचा है?

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कोल रॉयल्टी पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच आर-पार की नौबत आ गई है। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य राजीव शुक्ला ने सदन में बकाया वापसी पर सवाल उठाया। उन्होंने केंद्रीय कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी से पूछा कि राज्यों को कब तक कोल रायल्टी की राशि मिल जाएगी? इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि कोल ब्लॉकों से अतिरिक्त लेवी के रूप में 6 हजार 967 करोड़ की राशि एकत्र की गई है। इसमें 60 फीसदी यानी करीब 4 हजार 24 करोड़ 38 लाख रुपए की राशि सिर्फ छत्तीसगढ़ से मिली है। केंद्र सरकार ने भारत के सॉलिसीटर जनरल से राय लेने के बाद यह तय किया है कि यह राशि राज्यों को नहीं दी जाएगी।

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इस फैसले से केंद्र और राज्य के बीच टकराव बढ़ गया है। सीएम भूपेश बघेल ने साफ कहा कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। हालांकि पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक के मुताबिक केंद्र सरकार से छत्तीसगढ़ को जो राशि मिलनी जानी चाहिए, वह लगातार मिल रही है। तमाम सियासी बयानबाजी के बीच छत्तीसगढ़ के लोग खुद को छला हुआ महसूस कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के कोयले से दूसरे राज्यों के लोगों की जिंदगी रोशन हो रही है लेकिन यहां के लोगों को अपने हक के लिए तरसना पड़ रहा है।

 


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