(दीपक रंजन)
नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) लोकसभा की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले सितंबर में पुनर्गठन के बाद से संसद की विभिन्न विभागों संबंधी 16 स्थायी समितियों और लोक लेखा समिति (पीएसी) की बैठकों में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के लिए औसतन 53 प्रतिशत सदस्य ही उपस्थित रहे।
आंकड़ों के अनुसार ‘कोरम’ पूरा न होने के कारण संसदीय समितियों की पांच बैठकों को स्थगित करना पड़ा। कोरम पूरा करने के लिए कम से कम 11 सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होती है।
कोरम का अर्थ समिति या सदन की बैठक चलाने के लिए उपस्थिति सदस्यों की एक निश्चित न्यूनतम संख्या होनी चाहिए।
आंकड़ों के अनुसार, दूरसंचार विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता विषय पर चर्चा के लिए निर्धारित संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई।
पांच जनवरी 2026 को जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति की बैठक भी कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई। इस बैठक में डब्ल्यूएपीसीओसी लिमिटेड व एनपीसीसी लिमिटेड के कार्यों और पीएमकेएसवाई एवं अन्य सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के तहत जल प्रबंधन में उनके समन्वय पर चर्चा होनी थी।
आंकड़ों के अनुसार, 10 नवंबर को भी जल संसाधन संबंधी स्थायी समिति की बैठक कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई।
इस बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत गंगा और उसकी सहायक नदियों के संरक्षण, विकास, प्रबंधन और प्रदूषण नियंत्रण पर चर्चा होनी थी, जिसमें परियोजनाओं की प्रगति, समय-सीमा और राज्य सरकारों के प्रदर्शन की समीक्षा शामिल थी। इसके अलावा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना – अन्य बेसिनों का अवलोकन भी प्रस्तावित था।
बाइस अप्रैल को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी स्थायी समिति की बैठक भी स्थगित कर दी गई। इस बैठक में भूमि संसाधन विभाग (ग्रामीण विकास मंत्रालय), जनजातीय कार्य मंत्रालय और खान मंत्रालय के प्रतिनिधियों को समिति को जानकारी देनी थी।
इसके अलावा, आठ अप्रैल 2026 को भी ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी स्थायी समिति की बैठक कोरम पूरा न होने के कारण स्थगित कर दी गई।
संसद की एक स्थायी समिति में कुल 31 सदस्य होते हैं — जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा से होते हैं।
भारत की लोक लेखा समिति (पीएसी) में कुल 22 सदस्य होते हैं। इनमें 15 सदस्य लोकसभा और सात सदस्य राज्यसभा से होते हैं।
आंकड़ों से पता चलता है कि कृषि, खाद्य एवं उपभोक्ता मामले, रसायन एवं उर्वरक, ऊर्जा तथा सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालयों से संबंधित समितियों समेत 16 स्थायी समितियों की बैठकों में औसतन लगभग 47 प्रतिशत सदस्य अनुपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे हैं कि सांसद संसदीय समितियों की बैठकों में नियमित रूप से उपस्थित रहें।
आंकड़ों के अनुसार, रेलवे, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, विदेश मामलों और वित्त संबंधी स्थायी समितियों की बैठकों में सदस्यों की उपस्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही।
इस वर्ष 10 फरवरी को आयोजित विदेश मामलों संबंधी स्थायी समिति की बैठक में 28 सदस्य उपस्थित थे।
इस बैठक में विदेश मंत्रालय और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (वाणिज्य विभाग) के प्रतिनिधियों ने ‘विदेश नीति से जुड़े मौजूदा घटनाक्रम’ विषय पर समिति को जानकारी दी, जिसमें भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), भारत-बांग्लादेश संबंध आदि शामिल थे।
उनतीस अक्टूबर 2025 को आयोजित विदेश मामलों की संसदीय समिति की बैठक में केवल 13 सदस्य उपस्थित थे, जबकि 30 अक्टूबर की बैठक में 11 सदस्यों ने भाग लिया।
दस अप्रैल को आयोजित कृषि संबंधी संसदीय स्थायी समिति की बैठक में केवल 12 सदस्य मौजूद थे।
विभिन्न स्थायी समितियों की बैठकों में महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने ‘रणनीतिक स्थानों और सीमा क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कार्यों की समीक्षा’ के बारे में जानकारी दी।
इसके अलावा, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने ‘नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास’ विषय पर जानकारी दी।
इस दौरान ‘भारत-श्रीलंका संबंध और आगे की दिशा’ जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। इसमें विदेश सचिव ने हालिया घटनाक्रम पर जानकारी दी, जिसमें ईरान युद्ध और भारत-अमेरिका संबंध शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के दौरान भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा, संरक्षा और स्वदेश वापसी के संबंध में समिति को जानकारी दी।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा तेल क्षेत्र के केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (सीपीएसई) के प्रतिनिधियों ने ‘पेट्रोलियम उत्पादों की विपणन और आपूर्ति’ विषय पर प्रस्तुति दी।
इस अवधि में रेलवे मंत्रालय (रेलवे बोर्ड) के प्रतिनिधियों ने ‘रेलवे स्टेशनों पर सार्वजनिक सुविधाओं में सुधार’ विषय पर मौखिक साक्ष्य प्रस्तुत किए।
इसके साथ ही रेलवे मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर मसौदा रिपोर्ट पर विचार और उसे अपनाने की प्रक्रिया भी शामिल रही।
भाषा जोहेब माधव
माधव