कोलकाता, 16 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने शनिवार को पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने यह जानकारी दी।
दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमले किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और कानून-व्यवस्था सख्ती से लागू की जाएगी।
शुभेंदु ने पुलिसिंग और प्रशासन पर अपनी सरकार का रुख रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘पहले शासकों का कानून था; अब कानून का शासन है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस कल्याण बोर्ड का गठन नेक इरादे से किया गया था। लेकिन अंततः यह एक पार्टी का मुखौटा संगठन बन गया। मुझे नहीं पता कि इससे पुलिसकर्मियों के कल्याण में क्या लाभ हुआ, लेकिन यह अवैध रूप से (नौकरी की अवधि बढ़ाने का) अड्डा बन गया। कुछ लोगों को व्यक्तिगत रूप से इसका फायदा मिला है। आज हम इस बोर्ड को भंग कर रहे हैं।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि महिला पुलिसकर्मियों को उनके गृह जिलों के भीतर ही तैनाती में प्राथमिकता दी जाएगी ताकि उन्हें पेशेवर और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मदद मिल सके।
उन्होंने पुलिस को बांग्लादेश के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के नदी क्षेत्रों से होने वाली घुसपैठ के खिलाफ सतर्क रहने को कहा और अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया।
शुभेंदु ने जबरन वसूली के खिलाफ अपनी सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि ऑटो-रिक्शा और टोटो (ई-रिक्शा) चालकों से अवैध धन की वसूली तुरंत बंद होनी चाहिए।
उन्होंने लोगों से विशिष्ट शिकायतों के साथ आगे आने का आग्रह करते हुए कहा, ‘‘पुलिस शिकायतों की जांच करेगी और उसके अनुसार कार्रवाई करेगी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘अगर कोई जबरन वसूली में शामिल है, तो इसकी सूचना दें।’’
बैठक में विभिन्न जिलों के प्रशासनिक और पुलिसिंग मुद्दों की समीक्षा की गई, जिसमें राज्य भर के वरिष्ठ अधिकारियों की डिजिटल उपस्थिति रही।
भाषा
नेत्रपाल माधव
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