बेंगलुरु, नौ सितंबर (भाषा) कर्नाटक के बेंगलुरु में ठगों ने पुलिस उपायुक्त, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का अधिकारी और एक न्यायाधीश बनकर 73 वर्षीय बुजुर्ग को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उनसे 30 लाख रुपये से अधिक की राशि कथित तौर पर ऐंठ ली। पुलिस ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
पुलिस ने बताया कि यह घटना 12 से 19 अगस्त के बीच हुई थी। शिकायतकर्ता के अनुसार, 12 अगस्त की शाम लगभग छह बजे उन्हें एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को सीबीआई अधिकारी संदीप कुमार बताया।
फोन करने वाले व्यक्ति ने बुजुर्ग को बताया कि उनका नाम धन शोधन से जुड़े एक मामले में सामने आया है और उनके नाम पर जब्त बैंक खाते और एटीएम कार्ड का बड़े वित्तीय लेन-देन के लिए दुरुपयोग किया गया।
कुछ ही देर बाद, एक अन्य व्यक्ति ने शिकायतकर्ता को फोन किया और खुद को पुलिस उपायुक्त नीरज कुमार बताया।
ठग ने शिकायतकर्ता को बताया कि वह ‘डिजिटल अरेस्ट’ में है और उन्हें फोन न काटने का निर्देश दिया।
शिकायत में बताया गया कि 13 अगस्त को अपराह्न लगभग एक बजे पीड़ित को ऑनलाइन एक ‘न्यायाधीश’ के सामने कथित तौर पर पेश किया, जहां उससे अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए एक शपथ-पत्र देने को कहा गया।
प्राथमिकी के मुताबिक, इस बहाने बुजुर्ग को आरटीजीएस के जरिए दो अलग-अलग बैंक खातों में 10.99 लाख रुपये भेजने के लिए मजबूर किया गया। प्राथमिकी में बताया गया कि अगले दिन धोखेबाजों ने नीरज कुमार और संदीप कुमार बनकर शिकायतकर्ता से संपर्क करना जारी रखा तथा उनसे व उनके परिवार के सदस्यों के बैंक विवरण प्राप्त किए।
शिकायतकर्ता को 18 अगस्त को फिर से एक ‘न्यायाधीश’ के सामने ऑनलाइन पेश किया गया और कथित जांच के सिलसिले में 20 लाख रुपये और भेजने का निर्देश दिया गया।
शिकायतकर्ता ने यह मानते हुए कि जांच के बाद पैसा वापस मिल जाएगा, उन्होंने आरटीजीएस के माध्यम से दो और खातों में राशि भेज दी।
प्राथमिकी के मुताबिक, “ऑनलाइन मंच पर पुलिस उपायुक्त, सीबीआई अधिकारी और न्यायाधीश बनकर आरोपियों ने शिकायतकर्ता को अपने जाल में फंसाया तथा उससे कुल 30.99 लाख रुपये की ठगी की।”
पीड़ित बुजुर्ग ने अपने साथ हुई धोखाधड़ी का एहसास होने पर साइबर अपराध पुलिस से संपर्क किया और छह सितंबर को शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है।
भाषा जितेंद्र दिलीप
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