भोपालः Scam in Wheat Procurement मध्यप्रदेश अजब है, गजब है और सिस्टम इतना तीमारदार है कि सरकार की मंशा पर पानी फेरने से बाज नहीं आता है। आंकड़ेबाजी ऐसी कि जांच एजेंसियां भी मात खा जाएं। ताजा मामला गेहूं खरीदी से जुड़ा हुआ है। सूबे की बीजेपी सरकार ने रिकॉर्ड तोड़ गेहूं की खरीदी की। 104 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं खरीदी की मुनादी भी कराई गई। वेयर हाउसेस में भंडारण भी कराया गया, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड से करीब 23 करोड़ रुपए का 86 हजार क्विंटल गेहूं गायब हो गया।
प्रदेश के 13 जिलों में सरकारी गेंहू में सेंधमारी की गई, जिनमें सेंधमारी खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत का गृह जिला सागर 14,000 क्विंटल गेहूं गायब करने में सबसे अव्वल है। मामला उजागर हुआ तो जहां एक ओर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग जांच में जुटा तो दूसरी तरफ सियासत भी शुरू हो गई। एक तरफ खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत घोटाले से इनकार करते हुए जांच का करवाने की बात कह रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए कहा कि अगर गेहूं की खरीद हुई थी तो अनाज गायब कहां हो गया?
Scam in Wheat Procurement सवाल ये कि 86 हजार क्विंटल गेहूं गया तो गया कहां? सवाल ये कि क्या गेहूं की फर्जी खरीदी की गई? याकि ये गेहूं शराब माफिया निगल गया? सवाल ये भी कि मंत्री गोविंद राजपूत बिना जांच के क्लीनचिट क्यों दे रहे हैं? सवाल ये भी कि एमपी में नेताओं के वेयर हाउस में जांच क्यों नहीं होती? सबसे बड़ा सवाल ये कि क्या गेहूं गायब करने वाले जिम्मेदारों और उनके आकाओं के खिलाफ कोई कठोर एक्शन होगा?