चीन के साथ सीमा की स्थिति का असर दोनों देशों के संबंधों पर दिखेगा: भारत

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चीन के साथ सीमा की स्थिति का असर दोनों देशों के संबंधों पर दिखेगा: भारत

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 07:05 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 07:05 PM IST

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) भारत ने मंगलवार को कहा कि चीन के साथ उसकी सीमा की स्थिति का असर ‘‘व्यापक द्विपक्षीय संबंधों’’ पर दिखेगा और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखना ‘‘अत्यंत आवश्यक’’ है।

विदेश मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश में 27 स्थानों और इनकी विशेषताओं को भारतीय सर्वेक्षण के आधिकारिक मानचित्र में उनके मानक नामों से चिह्नित किए जाने पर चीन की आलोचना को भी खारिज किया और कहा कि यह राज्य भारत का ‘‘अटूट एवं अभिन्न’’ हिस्सा है तथा कोई भी इस ‘‘अविवादित सत्य’’ को नहीं बदल सकता।

मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नियमित प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘भारत और चीन के बीच सीमावर्ती इलाकों से जुड़े मामलों पर, हमने चीनी पक्ष के साथ बातचीत में हमेशा इस बात पर ज़ोर दिया है कि हम इन मुद्दों को बेहद गंभीर मानते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इन इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना बेहद ज़रूरी है। हमने यह भी कहा है कि सीमा से जुड़े मामलों की स्थिति का असर हमारे व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर भी पड़ेगा।’’

जायसवाल ने कहा कि भारत-चीन सीमा मामलों पर बातचीत और तालमेल के लिए स्थापित कार्य तंत्र (डब्ल्यूएमसीसी) की पिछले हफ़्ते हुई बैठक में इस बात को फिर से दोहराया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बैठक में दोनों पक्षों ने खुलकर बातचीत की और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति की समीक्षा की।’’

जायसवाल ने कहा कि भारतीय पक्ष ने फिर से इस बात पर ज़ोर दिया कि सीमावर्ती इलाकों में शांति और स्थिरता बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों के समग्र विकास के लिए ज़रूरी है।

उन्होंने कहा, ‘‘एलएसी पर शेष मुद्दों को सुलझाने और गलतफहमी या गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा कूटनीतिक एवं सैन्य चैनलों-जिनमें डब्ल्यूएमसीसी, स्थानीय कमांडर-स्तर की बैठकें और अन्य तंत्र शामिल हैं-का इस्तेमाल जारी रखने पर सहमति बनी।’’

वर्ष 2020 में गलवान घाटी में हुईं भीषण झड़पों और उसके बाद चार साल से ज़्यादा समय तक चले सैन्य टकराव के कारण भारत और चीन के रिश्तों में भारी तनाव आ गया था। इसके बाद, अपने रिश्तों को फिर से बेहतर बनाने के लिए दोनों देशों ने पिछले करीब एक साल से ज़्यादा समय में कई कदम उठाए हैं।

भाषा

नेत्रपाल अमित

अमित