अजीत डोभाल से अमेरिकी रादजूत ने की बातचीत, कहा: वैश्विक सुरक्षा के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी अहम

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अजीत डोभाल से अमेरिकी रादजूत ने की बातचीत, कहा: वैश्विक सुरक्षा के लिए अमेरिका-भारत साझेदारी अहम

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  • Publish Date - August 11, 2026 / 06:49 PM IST,
    Updated On - August 11, 2026 / 06:49 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से ‘सार्थक’ वार्ता के बाद अमेरिकी राजदूत सर्गियो गोर ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ अमेरिका की साझेदारी बहुत जरूरी है।

गोर ने कहा कि दोनों पक्षों के कई लक्ष्य एक जैसे हैं तथा उनके बीच आपसी सहयोग लगातार बढ़ रहा है।

अमेरिकी राजदूत की डोभाल के साथ यह बैठक विदेश सचिव विक्रम मिसरी के साथ उनकी बातचीत के एक दिन बाद हुई है।

गोर ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘अमेरिका-भारत रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करने पर चर्चा के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ सार्थक बैठक हुई।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत के साथ हमारी करीबी साझेदारी बहुत जरूरी है। अमेरिका और भारत के कई लक्ष्य एक जैसे हैं और हमारा सहयोग लगातार बढ़ रहा है।’’

वैसे भारतीय पक्ष ने बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है।

मिसरी और डोभाल से गोर की भेंट ऐसे समय में हुई है जब कुछ ही दिन पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच खासकर व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में भारत- अमेरिका समग्र वैश्विक रणनीतिक संबंधों को बढ़ाने पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फ़ोन पर बात की थी।

तुर्किये, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हाल में एक रक्षा समझौता होने के बाद भारत एवं अमेरिका के बीच उच्च स्तरीय राजनयिक संवाद बढ़ गया है। इस समझौते को नये क्षेत्रीय समीकरण के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि, यह तुरंत पता नहीं चल पाया है कि भारत और अमेरिका के बीच बातचीत में इस रक्षा समझौते पर चर्चा हुई या नहीं।

हालांकि समझा जाता है कि बैठकों में रक्षा, व्यापार और अहम खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर खास तौर पर चर्चा हुई।

जून में फ्रांस में मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे जल्द से जल्द एक संतुलित, परस्पर लाभकारी और व्यावसायिक रूप से सार्थक व्यापार समझौते की दिशा में काम करें।

पिछले साल जब वॉशिंगटन ने भारत पर दंडात्मक शुल्क लगाए और राष्ट्रपति ट्रंप ने मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुई सैन्य झड़पों को रूकवाने में अपनी भूमिका का दावा किया। उसके बाद दोनों देशों के रिश्ते बिगड़ गये थे।

ट्रंप के इस दावे पर भारतीय अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

अगले कुछ महीनों तक, अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि उन्होंने इन दो पड़ोसी देशों के बीच सैन्य टकराव को सुलझाया और लाखों लोगों की जान बचाई, क्योंकि यह मामला पूर्ण युद्ध की ओर बढ़ रहा था।

नयी दिल्ली ने कहा कि लड़ाई का रुकना भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत का नतीजा था; इसमें अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

अमेरिकी की नई आव्रजन नीति और एच1बी वीजा शुल्क बढ़ाने के फैसले ने भी भारत-अमेरिका संबंधों में गिरावट में योगदान दिया।

हालांकि, पिछले कुछ महीनों में दोनों पक्षों ने संबंधों को सुधारने की कोशिशें कीं और जल्द ही व्यापार समझौते को पक्का करने की दिशा में भी आगे बढ़े।

भाषा

राजकुमार नरेश

नरेश