साइप्रस के राष्ट्रपति अगले महीने भारत का दौरा करेंगे, द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे: राजदूत

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साइप्रस के राष्ट्रपति अगले महीने भारत का दौरा करेंगे, द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे: राजदूत

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 07:32 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 07:32 PM IST

अहमदाबाद, 27 अप्रैल (भाषा) साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स अगले महीने मुंबई पहुंचने वाले हैं। भारत यूरोप में साइप्रस के माध्यम से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकता है। भारत में साइप्रस के उच्चायुक्त इवागोरस व्रियोनाइड्स ने सोमवार को कहा कि यह यात्रा द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देगी।

साइप्रस के भारत में उच्चायुक्त व्रियोनाइड्स ने बताया कि राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स 20 मई को मुंबई पहुंचेंगे और फिर 22 मई को नयी दिल्ली के लिए रवाना होंगे।

उन्होंने पिछले साल जून में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की साइप्रस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित संयुक्त कार्य योजना का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘संयुक्त कार्य योजना का कार्यान्वयन पर्यटन, शिक्षा, वित्तीय सेवाओं, आईटी कर्मियों के आदान-प्रदान और जहाजरानी सहित कई क्षेत्रों में शुरू हो चुका है, जो सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।’’

व्रियोनाइड्स ने कहा कि राष्ट्रपति क्रिस्टोडौलाइड्स की यात्रा से भारत यूरोप में साइप्रस के माध्यम से अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा सकेगा।

उन्होंने बताया कि क्रिस्टोडौलाइड्स राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उपराष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगे और प्रमुख संस्थाओं के साथ बातचीत करेंगे।

उच्चायुक्त ने कहा कि मुंबई में यूरोबैंक की प्रतिनिधि उपस्थिति स्थापित होने की उम्मीद के साथ वित्तीय सहयोग और गहरा होगा और अल्फा बैंक और बैंक ऑफ साइप्रस जैसे अन्य बैंकों के भी इसमें शामिल होने की संभावना है।

उन्होंने कहा कि भारत की एकीकृत भुगतान इंटरफेस (यूपीआई) प्रणाली से संबंधित सहयोग सहित वित्तीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा और सार्थक बनाने के बारे में उम्मीद जताई।

व्रायोनाइड्स अहमदाबाद में आयोजित ‘यूरोपीय संघ परिषद की साइप्रस अध्यक्षता: यूरोपीय संघ और भारत के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करना’ नामक रणनीतिक संवाद से इतर आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे।

इस कार्यक्रम में राजनयिक और व्यावसायिक हितधारक एक साथ आए और इस बात पर चर्चा की कि व्यापार, विनियमन, निवेश, प्रौद्योगिकी और भू-राजनीतिक परिवर्तन किस तरह यूरोप के साथ भारत के संबंध को गढ़ रहे हैं।

भाषा संतोष माधव

माधव