नयी दिल्ली, छह जुलाई (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने वर्ष 2015 में पुराने शाहदरा थाने के निकट एक आयुर्वेद चिकित्सक को गोली मारकर हत्या का प्रयास करने के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरविंदर सिंह आरोपी सलमान उर्फ दांत टूटा के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 307 (हत्या का प्रयास) और 174ए (अपराध के बाद फरार रहने तथा भगोड़ा अपराधी घोषित किए जाने) के तहत दर्ज मामले की सुनवाई कर रहे थे।
दो जुलाई के आदेश में अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता की यह गवाही स्वीकार की जानी चाहिए कि आरोपी सलमान मोटरसाइकिल चला रहा था, जबकि पीछे बैठे अब्दुल वजीर उर्फ सिकंदर ने आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. अफाक हुसैन अंसारी की कमर की ओर गोली चलाई। अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह घटना 11 फरवरी 2015 की रात हुई थी, जब अंसारी एक ढाबे से खाना लेकर मोटरसाइकिल से अपने घर लौट रहे थे। तभी मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक उनके बराबर आए और पीछे बैठे युवक ने नजदीक से उन पर गोली चला दी।
गोली अंसारी के बाएं कूल्हे में लगी, जिसके बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। अंसारी तत्काल मोटरसाइकिल से श्यामलाल कॉलेज के पास स्थित पुलिस थाने पहुंचे और पुलिसकर्मियों को घटना की जानकारी दी। इसके बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान डॉ. अफाक हुसैन अंसारी ने अदालत को बताया कि वह अपने बहनोई की हत्या से जुड़े एक अलग मामले की पैरवी कर रहे थे और उन्हें उस मामले को आगे बढ़ाने से रोकने के उद्देश्य से उन पर हमला किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि गोली अब भी उनके शरीर में फंसी हुई है, क्योंकि चिकित्सकों का कहना था कि उसे निकालने से नसों को नुकसान पहुंच सकता है और उनके बाएं पैर में लकवा मारने का खतरा है।
बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज करते हुए कि मृत सह-आरोपी से पुरानी रंजिश के कारण सलमान को झूठा फंसाया गया, अदालत ने कहा कि ऐसा मानने का कोई ठोस आधार नहीं है कि घायल व्यक्ति वास्तविक हमलावर को छोड़कर सलमान की झूठी पहचान करेगा।
न्यायाधीश ने यह भी कहा कि घटनास्थल से हथियार या कारतूस का खोखा बरामद नहीं होना अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर नहीं करता, विशेषकर तब जब चिकित्सकीय साक्ष्यों से गोली लगने की पुष्टि होती है।
अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता के शरीर पर नजदीक से गोली चलाना उसकी हत्या करने के इरादे को दर्शाता है इसलिए हत्या के प्रयास के अपराध के सभी आवश्यक तत्व संदेह से परे सिद्ध होते हैं।
अदालत ने सलमान को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 174ए के तहत भी दोषी ठहराया।
अदालत ने कहा कि घटना के बाद वह फरार हो गया था और जून 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने उसे भगोड़ा अपराधी करार दिया था।
इसके बाद अदालत ने सजा की अवधि पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के लिए मामले को अगली तारीख के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
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