दिल्ली सरकार ने सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस के लिए नई एसओपी जारी की

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दिल्ली सरकार ने सिनेमाघरों और मल्टीप्लेक्स के सिनेमैटोग्राफ लाइसेंस के लिए नई एसओपी जारी की

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  • Publish Date - August 17, 2026 / 10:06 PM IST,
    Updated On - August 17, 2026 / 10:06 PM IST

नयी दिल्ली, 17 अगस्त (भाषा) दिल्ली सरकार ने सिनेमा लाइसेंस के लिए अलग-अलग विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेने की जटिल प्रक्रिया खत्म कर दी है और इसके स्थान पर निर्धारित समयसीमा वाली एकीकृत ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है, जिसके तहत जिला स्तरीय समिति अंतिम निर्णय लेगी तथा संबंधित विभाग संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के अंतर्गत वर्षों से चली आ रही अलग-अलग विभागों से एनओसी लेने की प्रक्रिया को समाप्त करते हुए एकीकृत एकल खिड़की प्रणाली को लागू किया गया है।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि नई व्यवस्था का उद्देश्य लाइसेंसिंग प्रक्रिया में अनावश्यक देरी और अलग-अलग विभागों के बीच समन्वय की समस्या को दूर करते हुए आवेदकों को एक स्पष्ट, जवाबदेह और तकनीक आधारित व्यवस्था उपलब्ध कराना है।

उन्होंने बताया कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी व समयबद्ध बनाने के लिए दो विशेष समितियों का गठन किया गया है तथा नई एसओपी वर्ष 2015 में अंतिम रूप दे दिया गया था, लेकिन पूर्व सरकार ने इसे लागू नहीं किया था।

उन्होंने बताया कि नई एसओपी को उच्चतम न्यायालय के उपहार सिनेमा त्रासदी से संबंधित निर्देशों के अनुपालन की दिशा में जारी किया गया है।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, नई एसओपी के अंतर्गत पहली समिति जिला लाइसेंसिंग समिति (डीएलसी) का गठन किया गया है। राजस्व विभाग के जिला प्रशासन के अधीन गठित डीएलसी लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी और इसका अध्यक्ष उपायुक्त (राजस्व) होगा।

समिति में पुलिस, अग्निशमन विभाग, नगर निगम/डीडीए के इंजीनियरिंग शाखा, दिल्ली जल बोर्ड और जिला मेडिकल अधिकारी सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

बयान में कहा गया है कि नई एसओपी इस विषय से संबंधित दिल्ली पुलिस के पूर्व स्थायी आदेशों का स्थान लेगी और पुरानी व्यवस्था में सिनेमेटोग्राफ लाइसेंस के लिए पुलिस, दमकल विभाग, नगर निगम, दिल्ली जल बोर्ड, बिजली वितरण कंपनियों और स्वास्थ्य विभाग सहित विभिन्न एजेंसियों से अलग-अलग एनओसी लेनी पड़ती थे, मगर नई व्यवस्था में इस बहु-विभागीय और क्रमिक प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। यही समिति निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर लाइसेंसिंग संबंधी अंतिम निर्णय लेगी।

बयान के अनुसार नई एसओपी के तहत दूसरी समिति जिला निरीक्षण समिति (डीआईसी) का गठन किया गया है। अब इसी समिति द्वारा प्रत्येक सिनेमाघर का निरीक्षण संयुक्त रूप से किया जाएगा और समिति में संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल होंगे।

इसमें कहा गया है कि समिति द्वारा एकीकृत, ई-साइन की गई और जियोटैग्ड सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर ई- जिला पोर्टल पर अपलोड की जाएगी और इससे अलग-अलग एनओसी के स्थान पर एकीकृत सत्यापन रिपोर्ट उपलब्ध होगी। डीआईसी का नेतृत्व उपमंडल मस्जिट्रेट (एसडीएम) करेंगे। इससे लाइसेंसिंग का निर्णय एक स्पष्ट संस्थागत व्यवस्था के तहत होगा, जबकि पुलिस और अन्य संबंधित विभागों की तकनीकी एवं सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियां भी बनी रहेंगी।

नई एसओपी के तहत एक प्रत्येक चरण के लिए समय-सीमा निर्धारित की गई है और आवेदन की प्रारंभिक जांच सात कार्यदिवस के भीतर, डीआईसी द्वारा 45 दिनों के भीतर निरीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद डीएलसी द्वारा 30 दिनों के भीतर निर्णय लिया जाना निर्धारित किया गया है।

बयान के मुताबिक, यदि डीएलसी निर्धारित समय-सीमा में निर्णय नहीं देती, लेकिन डीआईसी की रिपोर्ट में सभी वैधानिक और सुरक्षा संबंधी शर्तों का पूर्ण अनुपालन पाया जाता है तो पोर्टल पर लाइसेंस स्वतः बन जाएगा।

हालांकि जिन मामलों में अनिवार्य वैधानिक या सुरक्षा मानकों का पालन नहीं हुआ है, उनमें यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।

सरकार ने कहा है कि स्पष्ट किया है, “नई व्यवस्था में वार्षिक संयुक्त निरीक्षण, औचक निरीक्षण तथा पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और सिनेमाघर प्रबंधन की भागीदारी से वर्ष में दो बार मॉक ड्रिल का प्रावधान किया गया है। सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा होने की स्थिति में लाइसेंस के निलंबन और निरस्तीकरण की कार्रवाई के लिए भी स्पष्ट प्रवर्तन व्यवस्था रखी गई है।”

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव