दिल्ली: हाल के वर्षों में मार्च सबसे गर्म, सबसे नम, सर्वाधिक प्रदूषित महीनों में से एक रहा

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दिल्ली: हाल के वर्षों में मार्च सबसे गर्म, सबसे नम, सर्वाधिक प्रदूषित महीनों में से एक रहा

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  • Publish Date - March 31, 2026 / 09:54 PM IST,
    Updated On - March 31, 2026 / 09:54 PM IST

(वर्षा सागी)

नयी दिल्ली, 31 मार्च (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी में मार्च के महीने में मौसम का मिजाज बिल्कुल भी सामान्य नहीं रहा, जहां एक दिन बारिश, दूसरे दिन गर्मी और पूरे महीने प्रदूषण का स्तर ऊँचा रहा।

यह महीना दिल्ली में पिछले चार साल में सबसे ज़्यादा प्रदूषित, तीन साल में सबसे ज़्यादा बारिश वाला और 2022 के बाद से सबसे ज़्यादा गर्म महीना दर्ज किया गया।

सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक विश्लेषण के अनुसार, 2026 में राष्ट्रीय राजधानी में मार्च का महीना पिछले चार साल में सर्वाधिक प्रदूषित रहा। 30 मार्च तक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 181 रहा, जो 2022 के बाद से सर्वाधिक है। 2022 में यह 217 था। इसकी तुलना में, 2023 में औसत एक्यूआई 170, वर्ष 2024 में 176 और 2025 में 170 था।

विश्लेषण में कहा गया कि मार्च 2026 में दिल्ली में एक दिन ‘संतोषजनक’, 22 दिन ‘मध्यम’ और आठ दिन ‘खराब’ श्रेणी में रहे।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों पर आधारित सीआरईए के विश्लेषण के अनुसार 10 मार्च को दर्ज किया गया एक्यूआई स्तर (266) वर्ष 2023 के बाद से मार्च महीने का उच्चतम स्तर था।

मौसम के लिहाज़ से, यह महीना हाल के वर्षों के सबसे गर्म महीनों में से एक रहा। औसत अधिकतम तापमान 32.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक है। इससे पहले 2022 में मार्च में औसत अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

पिछले तीन साल में मार्च का यह महीना सर्वाधिक बारिश वाला भी रहा। मार्च 2026 में 19.82 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो 2023 के बाद से इस महीने के लिए सबसे ज़्यादा है। वर्ष 2023 में बारिश काफ़ी ज़्यादा यानी 50.4 मिलीमीटर हुई थी, जबकि 2024 और 2025 में बारिश का स्तर 2026 के स्तर से कम रहा।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि 11 से 31 मार्च के बीच छह पश्चिमी विक्षोभों ने उत्तर-पश्चिमी भारत को प्रभावित किया, जिसके कारण आंधी-तूफान आने के साथ ही बारिश हुई।

विशेषज्ञों ने इस महीने प्रदूषण की प्रकृति में आए बदलाव को भी रेखांकित किया है, जिसमें गैसीय प्रदूषकों ने प्रमुख भूमिका निभाई है।

सीआरईए के विश्लेषक मनोज कुमार ने पीटीआई-भाषा से कहा कि मार्च का महीना इस बढ़ती अहमियत को दिखाता है कि ओज़ोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड जैसे गैसीय प्रदूषकों से भी निपटना ज़रूरी है।

भाषा नेत्रपाल अविनाश

अविनाश