नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने जीएसटी और वैट में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं के सिलसिले में एक चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
इन अनियमितताओं में व्यावसायिक जानकारी का कथित दुरुपयोग, फर्जी कंपनियां बनानें और कई बैंक खातों के माध्यम से धन का हेरफेर करना शामिल है। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी।
ईओडब्ल्यू ने एक बयान में कहा कि आरोपियों की पहचान राजीव कुमार पारासर और चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता के रूप में हुई है और वे चांदनी चौक स्थित एक ‘अकाउंटेंसी फर्म’ से जुड़े हुए हैं।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, यशस्वी शर्मा नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज करायी गयी शिकायत के आधार पर इस मामले में धोखाधड़ी सहित विभिन्न आरोपों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
अपनी शिकायत में शर्मा ने आरोप लगाया कि उनकी कंपनी के वैट/जीएसटी संबंधी प्रमाण पत्रों और दस्तावेजों का उनकी जानकारी या सहमति के बिना धोखाधड़ी से उपयोग करके लगभग 28.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए गए।
इसमें कहा, ‘जांच से पता चला है कि शिकायतकर्ता की कंपनी के बैंक खातों का (जिसका संचालन कथित तौर पर राजीव कुमार पारासर और एक अन्य मालिक द्वारा किया जाता था) करोड़ों रुपये की धनराशि को इधर-उधर करने और उसमें हेरफेर करने के लिए बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया था।’
बैंक खातों के विश्लेषण से पता चला कि विभिन्न कंपनियों और संस्थाओं से जमा की गई धनराशि को बिना किसी वास्तविक व्यावसायिक गतिविधि के तुरंत नकद में निकाल लिया गया या आरटीजीएस, एनईएफटी और अन्य बैंकिंग चैनल के माध्यम से कई लाभार्थी खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।
जांच में यह भी पता चला कि फर्जी कंपनियों और खातों का संचालन कथित तौर पर अतुल गुप्ता और प्रकाश गुप्ता की सहायता से किया जा रहा था। प्रकाश गुप्ता की अब मृत्यु हो चुकी है।
पुलिस ने बताया कि जांचकर्ताओं को यह भी पता चला कि संदिग्ध कंपनियों के जीएसटी रिटर्न और वैधानिक अनुपालन कथित तौर पर इसी कंपनी के माध्यम से दाखिल किए गए थे।
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपियों ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कथित तौर पर जीएसटी/वैट संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग किया और फर्जी मालिकों के नाम पर बैंक खाते खोले या संचालित किए ताकि कई कंपनियों और लाभार्थी खातों के माध्यम से भारी रकम को इधर-उधर किया जा सके।
बयान में कहा गया है, ‘वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने और वित्तीय लेन-देन के सबूत मिटाने के लिए धनराशि को खातों के बीच तेजी से स्थानांतरित किया गया या नकद में निकाला गया।’
ईओडब्ल्यू ने कहा कि राजीव कुमार पारासर काफी समय तक फरार रहा और उसका पता लगाना मुश्किल था, आखिरकार 12 मई को गुप्ता और उसे ढूंढकर गिरफ्तार कर लिया गया।
बयान में आगे कहा गया है कि दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
भाषा
शुभम माधव
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