नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) दिल्ली सरकार ने मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के लिए जल निकासी पंपों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित करने हेतु एक विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा जारी की गयी 10 सूत्रीय मानक संचालन प्रक्रिया में शहर में मानसून के मौसम के दौरान यातायात प्रबंधन, जल निकासी, सड़कों को नुकसान से बचाने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जाने वाले उपायों को सूचीबद्ध किया गया है।
आदेश में कहा गया है, ‘‘जहां भी स्वचालन किया गया है, वहां पंपों को स्वचालित मोड पर चलाया जाएगा तथा कंपन, अत्यधिक गर्म हो जाने, असामान्य शोर या रिसाव की जांच के लिए संचालन की निरंतर निगरानी की जानी चाहिए।’’
मानक परिचालन प्रक्रिया के अनुसार, क्षेत्र के कर्मचारियों को वर्षा के दौरान संभावित स्थानों से पानी की प्रभावी निकासी सुनिश्चित करने के लिए जल निकासी प्रवाह की बारीकी से निगरानी करने का निर्देश दिया गया है।
आदेश में कहा गया है,‘‘निर्बाध संचालन के लिए पर्याप्त ईंधन भंडार (कम से कम 10 घंटे निरंतर चलने के लिए) बनाए रखा जाना चाहिए।’’
इसमें आगे कहा गया है कि बिजली गुल होने की स्थिति में कम से कम 70 प्रतिशत क्षमता वाले ‘वैकल्पिक जनरेटर’ तैयार रहने चाहिए, जिनकी क्षमता स्थापित पंप क्षमता के बराबर हो।
एसओपी निर्देशों में कहा गया है कि हर भारी बारिश के बाद भूमिगत गड्ढों से गाद निकाला जाना चाहिए।
इस वर्ष, पीडब्ल्यूडी ने दिल्ली में कुल 448 जलभराव वाले प्रमुख स्थलों की पहचान की है, जिनमें 2023, 2024 और 2025 के स्थल भी शामिल हैं।
एसओपी में कहा गया है, ‘‘भारी वर्षा की स्थिति में, पंप का संचालन केवल डीजल जनरेटर सेट पर ही किया जाएगा।’’
आदेश में कहा गया है, ‘‘कोई भी विद्युत केबल पानी में डूबी नहीं रहनी चाहिए। सभी अनाधिकृत व्यक्तियों को चालू पंप स्थलों से दूर रखा जाना चाहिए।’’
इसी बीच, लोकनिर्माण मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने नरेला क्षेत्र में नरेला-बवाना सड़क के हिस्से पर ‘प्रीकास्ट आरसीसी निकास’ परियोजना की आधारशिला रखी।
सिंह ने कहा, ‘‘यह कार्य दिल्ली की ड्रेनेज मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में जलभराव की समस्या का दीर्घकालिक और सुनियोजित समाधान प्रदान करना है।’’
भाषा राजकुमार माधव
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