युवाओं के साथ संवाद के दौरान सेना प्रमुख ने कैफे खोलने की अपनी इच्छा व्यक्त की

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युवाओं के साथ संवाद के दौरान सेना प्रमुख ने कैफे खोलने की अपनी इच्छा व्यक्त की

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  • Publish Date - May 16, 2026 / 04:30 PM IST,
    Updated On - May 16, 2026 / 04:30 PM IST

नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को यहां युवाओं के एक समूह के साथ हुई अनौपचारिक बातचीत में, न केवल उन्हें नेतृत्व के पाठ पढ़ाए, बल्कि ‘आहिस्ता जिंदगी’ नाम से एक कैफे खोलने का अपना निजी सपना भी साझा किया।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि उनका सपना एक ऐसा कैफे बनाना है जहां भागदौड़ भरी जिंदगी में मन को सुकून मिल सके।

उन्होंने कहा कि इस कैफे, जिसे उन्होंने अपने गृह राज्य मध्य प्रदेश में स्थापित करने की योजना बनाई है, का उद्देश्य एक कप कॉफी पर अनगिनत संवाद के रास्ते खोलना तथा लोगों के लिए अधिक सार्थक जीवन प्राप्त करने की दिशा में परिकल्पित और आदान-प्रदान किए गए विचारों के एक केंद्र स्थल के रूप में स्थान हासिल करना होगा।

जनरल द्विवेदी ने यहां मानेकशॉ केंद्र में ‘यूनिफॉर्म अनवील्ड’ द्वारा आयोजित ‘सेना संवाद’ सत्र के दौरान एक मेजबान के साथ अनौपचारिक बातचीत की तथा दिल्ली और आसपास के शहरों के विभिन्न स्कूलों से आए छात्रों के एक समूह से परिसंवाद किया।

सेना प्रमुख ने युवाओं से स्वस्थ रहने, कड़ी मेहनत करने और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के साथ ही सोशल मीडिया पर ‘रील’ देखने के बजाय शारीरिक गतिविधियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

अनौपचारिक बातचीत के दौरान, जनरल द्विवेदी से सैन्य वर्दी में भूमिका से परे उनकी भविष्य की योजनाओं के बारे में पूछा गया।

सेना प्रमुख ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि शायद कर्नल के पद पर ही मुझे यह एहसास हुआ कि अब उस समाज को कुछ लौटाने का समय आ गया है जिसने मुझे इतनी ऊंचाई तक पहुंचाया है। क्योंकि अब समय आ गया है कि मैं जो कुछ भी हासिल कर पाया हूं, उसके लिए धन्यवाद कहूं, आभार व्यक्त करूं।’’

जनरल द्विवेदी ने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके जैसे सैन्य अधिकारियों के लिए अब समय आ गया है कि वे सेवारत कर्मियों और नागरिक सदस्यों को मार्गदर्शन प्रदान करें।

उन्होंने कहा कि वे अपने गृह राज्य में आदिवासी समुदाय के सदस्यों के गांवों से पलायन को रोकने में योगदान देने की योजना बना रहे हैं।

जनरल द्विवेदी ने बताया, ‘‘मैं ‘आहिस्ता जिंदगी’ नाम से एक कैफे खोलने की भी योजना बना रहा हूं। क्योंकि आज इतनी भागदौड़ भरी जिंदगी है कि आप थक चुके हैं। आपके पास रुकने, सोचने-समझने और निर्णय लेने का समय नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि यह कैफे एक ऐसी जगह होगी जहां लोग एक कप कॉफी का आनंद लेते हुए आराम कर सकेंगे, और यहां ‘मुफ्त परामर्श’ सेवा भी उपलब्ध होगी।

भाषा शफीक माधव

माधव