चंडीगढ़, 11 जून (भाषा) पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) के नेता बलतेज सिंह पन्नू ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने 2015 के बेहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले की जांच कर रही पंजाब पुलिस के विशेष जांच दल (एसआईटी) को बताया था कि शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने अकाल तख्त के समक्ष घटना की ‘जिम्मेदारी स्वीकार’ की थी।
पन्नू ने कहा कि विशेष जांच टीम ने ज्ञानी रघबीर सिंह से यह जानने के लिए संपर्क किया था कि क्या बादल ने 2024 में सिखों की सर्वोच्च धार्मिक पीठ के समक्ष पेश होने पर फायरिंग की घटना की ‘जिम्मेदारी स्वीकार’ की थी।
इस बीच, बादल ने ज्ञानी रघबीर सिंह पर अकाल तख्त की ‘मर्यादा’ (शिष्टाचार) का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए उनकी आलोचना की।
पूर्व जत्थेदार पर आम आदमी पार्टी का सदस्य बनने का आरोप लगाते हुए शिरोमणि अकाली दल (शिअद) प्रमुख ने कहा कि वह ज्ञानी रघबीर सिंह के बयान के आधार पर आप नीत पंजाब सरकार द्वारा उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किये जाने से नहीं डरते हैं।
बादल दो दिसंबर, 2024 को अकाल तख्त के सामने पेश हुए, जब सिख धर्मगुरुओं ने शिरोमणि अकाली दल और पंजाब में उसकी सरकार द्वारा 2007 से 2017 तक की गई ‘गलतियों’ के लिए उनको और अन्य नेताओं के लिए ‘तनखैया’ घोषित किया।
वर्ष 2015 में फरीदकोट के बरगरी में बुर्ज जवाहर सिंह वाला गुरुद्वारे से गुरु ग्रंथ साहिब की एक प्रति की चोरी, बरगरी और बुर्ज जवाहर सिंह वाला में बेअदबी करने वाले हस्तलिखित पोस्टर लगाए जाने और बरगरी में पवित्र ग्रंथ के फटे पन्ने बिखरे हुए पाए जाने की घटनाएं घटी थीं।
इन घटनाओं के कारण फरीदकोट में बेअदबी को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए थे। अक्टूबर 2015 में बेअदबी के खिलाफ विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की गोलीबारी में बहबल कलां में गुरजीत सिंह और कृष्ण भगवान सिंह सहित दो लोगों की मौत हो गई, जबकि फरीदकोट के कोटकपुरा में कुछ लोग घायल हो गए।
भाषा संतोष माधव
माधव