नयी दिल्ली, 10 जुलाई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भारत को यूरेनियम की आपूर्ति करने के ऑस्ट्रेलिया के फैसले को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) की पूर्व सरकार के समय का फैसला बताने संबंधी कांग्रेस के दावे पर शुक्रवार को पलटवार करते हुए कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर और उनका क्रियान्वयन सरकारें करती हैं, राजनीतिक दल नहीं।
कांग्रेस ने इससे पहले कहा था कि भारत को यूरेनियम की बिक्री करने का ऑस्ट्रेलिया का फैसला प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कोई उपलब्धि नहीं है। पार्टी ने कहा था कि तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के बाद 2011 में भारत को यूरेनियम बेचने के लिए अपनी पार्टी की मंजूरी हासिल कर ली थी।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर और उनका क्रियान्वयन सरकारें करती हैं, राजनीतिक दल नहीं।
भंडारी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘हर सरकार गांधी-वाड्रा परिवार के ‘प्राइवेट लिमिटेड’ उद्यम की तरह काम नहीं करती।’’
उन्होंने कांग्रेस के दावों पर सवाल उठाते हुए पूछा कि अगर 2011 की मंजूरी इतनी बड़ी उपलब्धि थी तो 2011 से 2014 के बीच भारत को ऑस्ट्रेलिया से ‘‘यूरेनियम आपूर्ति’’ क्यों नहीं हुई।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ऑस्ट्रेलिया ने 2012 में कहा था कि भारत को ‘‘निकट भविष्य में यूरेनियम की आपूर्ति नहीं होगी।’’
भंडारी ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया असैन्य परमाणु सहयोग समझौते पर सितंबर 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से दीर्घकालिक यूरेनियम आपूर्ति संबंधी प्रतिबद्धताओं को 2026 में लागू किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस अपने समर्थकों को खुश करने के लिए ‘‘चांद पर भी दावा’’ कर सकती है, लेकिन ‘‘केवल कागजी घोषणाओं से नतीजे नहीं मिलते; मायने यह बात रखती है कि उन्हें वास्तव में लागू किया जाए।’’
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा था, ‘‘भाजपा का पूरा तंत्र यह दिखाने में जुटा है कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भारत को यूरेनियम की बिक्री प्रधानमंत्री मोदी की बड़ी उपलब्धि है। चार दिसंबर 2011 को तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड ने अक्टूबर 2008 के भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौते के बाद अपनी पार्टी से भारत को यूरेनियम बेचने की मंजूरी प्राप्त कर ली थी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के ‘ट्रोल’, जिनमें उसके कुछ सांसद भी शामिल हैं, उन्हें अपना ‘होमवर्क’ बेहतर ढंग से करना चाहिए।’’
रमेश ने दिसंबर, 2011 की मीडिया रिपोर्ट का ‘स्क्रीनशॉट’ भी साझा किया, जिनमें कहा गया था कि ऑस्ट्रेलिया की लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम की बिक्री का रास्ता खोलने की योजना का समर्थन किया था।
भाषा
सिम्मी नरेश
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