नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर में पिछले कई महीने से चला आ रहा सियासी ड्रामा खत्म हो गया है। यहां सरकार बनाने के प्रयासों के बीच राज्यपाल ने बुधवार रात अचानक जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर दी। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के गठजोड़ से सरकार बनाने की शुरू हुई कोशिशें परवान चढ़ती इससे पहले ही रात में राजभवन ने राज्य विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया। इसी के साथ सरकार बनाने की संभावना खत्म हो गई और अब चुनाव ही एकमात्र विकल्प बच गया है।
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भाजपा को जम्मू-कश्मीर में दोबारा सत्तासीन होने से रोकने के लिए एक-दूसरे की कट्टर विरोधी पीडीपी, नेकां और कांग्रेस के बीच गठबंधन सरकार बनाने पर सहमति बन चुकी थीं। पीडीपी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए फैक्स भी भेज दिया था। उन्होंने 56 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया था।
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लेकिन फैक्स राजभवन को रिसीव नहीं हुआ। आपको बता दें कि 87 सदस्यों वाले राज्य विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 44 विधायकों का समर्थन जरूरी है। भाजपा के पास 25 और सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व वाली पीपुल्स कांफ्रेंस के दो विधायक हैं। पीडीपी के 29, नेशनल कांफ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायकों के अलावा पांच अन्य विधायक हैं। नेहरू कांग्रेस, पीडीपी व कांग्रेस अगर आपस में मिलें तो कुल विधायक 56 हो जाते।