बेंगलुरु। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए शनिवार को मतदान होगा। अधिकांश सर्वेक्षणों एवं ओपिनियन पोल के अनुसार मुख्य मुकाबला सत्तारुढ़ कांग्रेस और भाजपा के बीच है। हालांकि पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा का जनता दल सेकुलर किंगमेकर की भूमिका निभा सकता है।
राज्य के 4.98 करोड़ से अधिक मतदाता 2600 से अधिक उम्मीदवारों में से अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। इन 2.52 करोड़ से अधिक पुरुष, करीब 2.44 करोड़ महिलाएं तथा 4,552 ट्रांसजेंडर मतदाता हैं। मतदान के लिए राज्य में 55,600 से ज्यादा पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं। वहीं 3.5 लाख से ज्यादा कर्मी चुनाव ड्यूटी पर लगाए गए हैं। कुछ मतदान केंद्रों पर पहली बार दिव्यांग कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है।
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कर्नाटक में 1985 के बाद से कोई भी दल लगातार दूसरी बार सरकार नहीं बना पाया है। वहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि भाजपा के लिए कर्नाटक दूसरी बार दक्षिण में कदम रखने का द्वारा होगा। भाजपा इससे पहले एक बार कर्नाटक में सरकार बना चुकी है। 2008 से 2013 का भाजपा शासनकाल भ्रष्टाचार के आरोपों और पार्टी नेताओं के अंतर्कलह से घिरा रहा था। उसके एक मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा जो फिलहाल मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार भी हैं, भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल में थे।
इधर जनता दल सेकुलर के अध्यक्ष एचडी कुमारस्वामी यह स्वीकारते हैं कि उनकी पार्टी के लिए यह जीवन-मरण का सवाल है। जदएस एक दशक से सत्ता से बाहर है।
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वहीं कांग्रेस को विश्वास है कि वह लगातार सत्ता में नहीं आने के चलन को तोड़ेगी। वर्तमान मुख्यमंत्री सिद्धरमैया का कहना है कि उनकी पार्टी इतिहास रचेगी।
राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा की 223 सीटों के लिए शनिवार को मतदान होगा। एक सीट पर मतदान भाजपा प्रत्याशी और वर्तमान विधायक बीएन विजयकुमार के निधन के चलते स्थगित कर दिया गया है। वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने 122 सीटें जीती थीं। भाजपा और जदएस को 40-40 सीटें मिली थीं। कर्नाटक जनता पक्ष को छह, बडवारा श्रमिकारा रैयतरा को चार, कर्नाटक मक्कल पक्ष, समाजवादी पार्टी और सर्वोदय कर्नाटक पक्ष को एक एक सीटें मिली थीं और नौ निर्दलीय विजयी रहे थे। राज्य में मतगणना 15 मई को होगी।
वेब डेस्क, IBC24