Lal krishna Advani Bharat Ratna: लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से किया जाएगा सम्मानित, पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दी जानकारी

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  • Publish Date - February 3, 2024 / 11:41 AM IST,
    Updated On - February 3, 2024 / 11:55 AM IST

नई दिल्ली: Lal krishna Advani Bharat Ratna देश की राजधानी दिल्ली से एक बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवानी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। इस बात की जानकारी पीएम नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर दी है।

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पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा है कि मुझे यह बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि लालकृष्ण आडवाणी को भारत रत्न से सम्मानित किया जाएगा। मैंने भी उनसे बात की और इस सम्मान से सम्मानित होने पर उन्हें बधाई दी। हमारे समय के सबसे सम्मानित राजनेताओं में से एक, भारत के विकास में उनका योगदान अविस्मरणीय है। उनका जीवन जमीनी स्तर पर काम करने से शुरू होकर हमारे उपप्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा करने तक का है। उन्होंने हमारे गृह मंत्री और सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनके संसदीय हस्तक्षेप हमेशा अनुकरणीय और समृद्ध अंतर्दृष्टि से भरे रहे हैं।

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Lal krishna Advani Bharat Ratna सार्वजनिक जीवन में आडवाणी की दशकों लंबी सेवा को पारदर्शिता और अखंडता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता द्वारा चिह्नित किया गया है, जिसने राजनीतिक नैतिकता में एक अनुकरणीय मानक स्थापित किया है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान को आगे बढ़ाने की दिशा में अद्वितीय प्रयास किए हैं। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाना मेरे लिए बहुत भावुक क्षण है।’ मैं इसे हमेशा अपना सौभाग्य मानूंगा कि मुझे उनके साथ बातचीत करने और उनसे सीखने के अनगिनत अवसर मिले।

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कौन हैं लालकृष्ण आडवानी

1980 में भारतीय जनता पार्टी के गठन के बाद से ही लालकृष्ण आडवाणी वह शख्स हैं जो सबसे ज्यादा समय तक पार्टी में अध्यक्ष पद पर बने रहे हैं। बतौर सांसद 3 दशक की लंबी पारी खेलने के बाद लालकृष्ण आडवाणी पहले गृह मंत्री रहे, बाद में पूर्व पीएम अटल की कैबिनट में (1999-2004) उप-प्रधानमंत्री बने। आडवाणी को बेहद बुद्धिजीवी, काबिल और मजबूत नेता माना जाता है जिनके भीतर मजबूत और संपन्न भारत का विचार जड़ तक समाहित है।

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पाकिस्तान में हुआ था जन्म

लालकृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को सिन्ध प्रान्त (पाकिस्तान) में हुआ था। वह कराची के सेंट पैट्रिक्स स्कूल में पढ़े हैं और उनके देशभक्ति के जज्बे ने उन्हें राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह जब महज 14 साल के थे, उस समय से उन्होंने अपना जीवन देश के नाम कर दिया। 1947 में लालकृष्ण आडवाणी देश के आजाद होने का जश्न भी नहीं मना सके क्योंकि आजादी के महज कुछ घंटों में ही उन्हें अपने घर को छोड़कर भारत रवाना होना पड़ा। हालांकि उन्होंने इस घटना को खुद पर हावी नहीं होने दिया और मन में इस देश को एकसूत्र में बांधने का संकल्प ले लिया। इस विचार के साथ वह राजस्थान में आरएसएस प्रचारक के काम में लगे रहे।

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भाजपा को राष्ट्रीय पार्टी बनाने का श्रेय

1980 से 1990 के बीच लालकृष्ण आडवाणी ने भाजपा को एक राष्ट्रीय स्तर की पार्टी बनाने के लिए अपना पूरा समय दिया और इसका परिणाम तब सामने आया, जब 1984 में महज 2 सीटें हासिल करने वाली पार्टी को लोकसभा चुनावों में 86 सीटें मिली जो उस समय के लिहाज से काफी बेहतर प्रदर्शन था। पार्टी की स्थिति 1992 में 121 सीटों और 1996 में 161 पर पहुंच गई। आजादी के बाद पहली बार कांग्रेस सत्ता से बाहर थी और बीजेपी सबसे अधिक संख्या वाली पार्टी बनकर उभरी थी।

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