सुरंग परियोजना स्थल से 200 मीटर से अधिक दूरी पर हुआ भूस्खलन: कोंकण रेलवे

Ads

सुरंग परियोजना स्थल से 200 मीटर से अधिक दूरी पर हुआ भूस्खलन: कोंकण रेलवे

  •  
  • Publish Date - July 10, 2026 / 02:53 PM IST,
    Updated On - July 10, 2026 / 02:53 PM IST

वायनाड (केरल), 10 जुलाई (भाषा) वायनाड-कोझिकोड सुरंग निर्माण का समग्र ठेका संभाल रहे कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को दावा किया कि सात जुलाई को हुआ भूस्खलन खुदाई वाले क्षेत्र से करीब 200 मीटर दूर हुआ था, न कि उस स्थान पर जहां स्वीकृत योजना और नक्शों के अनुसार ढलान को सुरक्षित किया गया था।

कोंकण रेलवे की ओर से जारी एक नोट में दावा किया गया कि भूस्खलन सुरंग के ऊपरी हिस्से से 100 मीटर से अधिक ऊंचाई पर हुआ। ऊंचाई में इस अंतर के कारण संरक्षित ढलान के निचले हिस्सों पर भारी दबाव पड़ा और एक ही झटके में आसपास के पेड़ उखड़ गए तथा मिट्टी बह गई।

कोंकण रेलवे ने दावा किया कि घटनास्थल पर जमा मिट्टी और मलबा स्थिर था, लेकिन “भूस्खलन के मलबे का बहाव इतना अचानक हुआ” कि वहां मौजूद लोग इसकी चपेट में आ गए।

कोंकण रेलवे ने बताया कि जून के मध्य से मानसून शुरू होने के कारण काम पहले ही रोक दिया गया था और उस समय कोई सुरंग निर्माण का कार्य नहीं चल रहा था। घटना के समय सुबह मौके पर केवल तकनीकी कर्मचारी मौजूद थे, जो उस क्षेत्र में ढलान की स्थिति पर नजर रख रहे थे जहां खुदाई से निकली मिट्टी जमा की गई थी।

उसने दावा किया कि घटना से पहले जरूरी अस्थायी सुरक्षा उपाय, जल निकासी की व्यवस्था और ढलान की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय लागू किए गए थे।

कोंकण रेलवे का यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब यह आरोप लगाए जा रहे हैं कि परियोजना स्थल पर जमा मिट्टी को अधिकारियों के बार-बार निर्देश के बावजूद नहीं हटाया गया और इसी वजह से भूस्खलन की तीव्रता बढ़ गई।

यह भूस्खलन सात जुलाई को वायनाड और कोझिकोड जिलों को जोड़ने के लिए प्रस्तावित अनाक्कोम्पोयिल-मेप्पाडी सुरंग परियोजना स्थल पर हुआ था। इस हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है जबकि एक अन्य व्यक्ति अभी भी लापता है।

भाषा प्रचेता नरेश

नरेश