नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) अतिरिक्त केंद्रीय भविष्य निधि आयुक्त पंकज द्वारा लिखित किताब ‘माई लेडी इन ब्लैक’
एक ऐसे निडर अधिकारी की निजी अनुभव गाथा है जो फैक्टरी कर्मचारियों, बुनकरों और दिहाड़ी मजदूरों को न्याय दिलाने के अपने प्रयासों में स्वयं व्यवस्था के निशाने पर आ जाते हैं।
किताब का विमोचन 30 अगस्त को यहां ‘इंडिया हैबिटेट सेंटर’ में होगा, जिसमें वरिष्ठ लोकसेवक, न्यायपालिका के सदस्य और पाठक मौजूद रहेंगे। यह शाम सच्चाई, हिम्मत और कानून के शासन का जश्न मनाने के लिए होगी।
यह भविष्य निधि अधिकारी के तौर पर पंकज के सफ़र की कहानी है। उन्होंने विभाग के इतिहास के कुछ सबसे अहम प्रवर्तन अभियानों की अगुवाई की, जिनमें थानों को अस्थायी सिविल जेलों में बदलना और नियमों का पालन न करने वाले उद्योगपतियों को रिमांड पर लेना शामिल था।
प्रकाशक पेनमानुष के अनुसार, अपने इन्हीं प्रयासों के लिए पंकज ने समुदायों के बीच विशिष्ट प्रतिष्ठा हासिल की लेकिन इसी के कारण उन्हें एक बहुत ही सोची-समझी साज़िश का निशाना बनाया गया – यह साज़िश उस तंत्र ने नहीं रची थी जिसकी उन्होंने सेवा की थी, बल्कि एक ऐसे अधिकारी ने रची थी जिसने अपनी निजी दुश्मनी निकालने के लिए कानून लागू करने वाली मशीनरी का गलत इस्तेमाल किया।
किताब के विवरण में लिखा है, ‘‘इसके बाद 14 साल तक चली एक बेहद मुश्किल कानूनी लड़ाई का दौर शुरू हुआ जिसमें होटवार जेल में दो महीने की कैद, झूठी गवाही के आधार पर तैयार किया गया आरोपपत्र, कानून की ऐसी धारा के तहत प्रतिबंध आदेश जो असल में मौजूद ही नहीं थी।
इस सब के बीच पंकज मूल्यों के प्रति अपनी आस्था, परिवार तथा सच्चाई में अटूट विश्वास के दम पर डटे रहे।’’
इसमें कहा गया है कि कहानी का अंत पूरी तरह और सम्मानजनक रूप से बरी होने के साथ होता है – यह केवल तकनीकी आधार पर रिहाई नहीं, बल्कि निर्दोष होने का स्पष्ट न्यायिक फ़ैसला था, जो तब आया जब अभियोजन पक्ष का मामला उसके अपने विरोधाभासों के बोझ तले ढह गया।
भाषा नेत्रपाल नरेश
नरेश