नयी दिल्ली, 16 मई (भाषा) स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए ‘कैप्टागन’ की तस्करी में संलिप्त अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है और 182 करोड़ रुपये मूल्य का 227.7 किलोग्राम ‘जिहादी ड्रग’ जब्त किया है। गृह मंत्रालय ने शनिवार को यह जानकारी दी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस सफलता की घोषणा करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट कर पहली बार ‘कैप्टागन’ की खेप जब्त करने के लिए एजेंसी की सराहना की।
सूत्रों के अनुसार, ‘कैप्टागन’ फेनेथाइलीन नामक एक कृत्रिम उत्तेजक दवा का प्रचलित नाम है, जिसे 1960 के दशक में विकसित किया गया था। पश्चिम एशिया के संघर्षग्रस्त क्षेत्रों और चरमपंथी नेटवर्क द्वारा इसका दुरुपयोग एवं तस्करी किए जाने के लगातार सामने आए मामलों तथा खुफिया सूचनाओं के कारण इसे अक्सर ‘जिहादी ड्रग’ के नाम से भी जाना जाता है।
यह शब्द इसलिए प्रचलन में आया क्योंकि माना जाता है कि इस दवा के उत्तेजक प्रभाव उपयोगकर्ताओं को लंबे समय तक जागे रहने, थकान दूर रखने, आक्रामकता तथा जोखिम उठाने की प्रवृत्ति बढ़ाने और तनावपूर्ण परिस्थितियों में लंबे समय तक युद्ध जैसी गतिविधियों में सक्रिय बने रहने में मदद करते हैं।
शाह ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि मोदी सरकार ‘‘नशामुक्त भारत’’ बनाने के संकल्प के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी एजेंसियों ने ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत पहली बार ‘जिहादी ड्रग’ कहे जाने वाले मादक पदार्थ कैप्टागन की 182 करोड़ रुपये की खेप जब्त की है। यह बड़ी उपलब्धि है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पश्चिम एशिया भेजे जा रहे इस मादक पदार्थ का भंडाफोड़ करना और एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी, नशे के खिलाफ हमारी कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति का एक उदाहरण है।’’
गृह मंत्री शाह ने एनसीबी की टीम को इस सफलता के लिए बधाई दी।
अभियान के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए गृह मंत्रालय ने कहा कि एनसीबी को एक विदेशी मादक पदार्थ-रोधी एजेंसी से सूचना मिली थी कि भारत की जमीन का इस्तेमाल ‘कैप्टागन’ की तस्करी के लिए पारगमन मार्ग के रूप में किया जा रहा है।
बयान में कहा गया कि जांच में नयी दिल्ली के नेब सराय इलाके में एक मकान की पहचान हुई और 11 मई को तलाशी के दौरान एक ‘चपाती कटिंग’ मशीन में कैप्टागन की करीब 31.5 किलोग्राम गोलियां मिलीं, जिन्हें बड़ी चालाकी से छिपाया गया था।
प्रारंभिक जांच से पता चला कि यह मशीन सऊदी अरब के जेद्दा को निर्यात की जानी थी।
मंत्रालय के अनुसार, नेब सराय का यह मकान एक सीरियाई नागरिक ने किराए पर लिया था, जो 15 नवंबर 2024 को पर्यटक वीजा पर भारत आया था। उसका वीजा 12 जनवरी 2025 को समाप्त हो चुका था और वह अवैध रूप से भारत में रह रहा था। उससे पूछताछ के बाद 14 मई को गुजरात के मुंद्रा स्थित ‘कंटेनर फैसिलिटेशन स्टेशन’ में एक कंटेनर से करीब 196.2 किलोग्राम ‘कैप्टागन’ चूरा बरामद किया गया।
इसने कहा, ‘‘यह कंटेनर सीरिया से मंगाया गया था और इसमें घोषित माल के रूप में भेड़ की ऊन दर्शाई गई थी। कंटेनर की गहन तलाशी में तीन बैगों में 196.2 किलोग्राम कैप्टागन चूरा मिला।’’
बयान में कहा गया, ‘‘प्रारंभिक जांच से पता चला है कि जब्त खेप खाड़ी क्षेत्र खासकर सऊदी अरब और आसपास के पश्चिम एशिया देशों को भेजी जानी थी, जहां कैप्टागन का दुरुपयोग एक गंभीर कानूनी समस्या बन चुका है।’’
मंत्रालय ने बताया कि ‘ऑपरेशन रेजपिल’ के तहत कैप्टागन की कुल 227.7 किलोग्राम गोलियां और चूरा जब्त किया गया, जिसकी खाड़ी और पश्चिम एशिया के बाजारों में अनुमानित कीमत करीब 182 करोड़ रुपये है।
बयान के अनुसार, कैप्टागन में मुख्य रूप से फेनेटाइलीन और एम्फेटामाइन पाए जाते हैं, जो स्वापक औषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत मादक पदार्थ हैं।
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खारी नेत्रपाल
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