(कोमल शर्मा)
नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दोबारा राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) देने की तैयारी कर रहे कई अभ्यर्थी घबराहट, बिगड़ी हुई दिनचर्या, आत्मविश्वास में कमी और परीक्षा प्रणाली को लेकर बढ़ते अविश्वास से जूझ रहे हैं ।
सालों और महीनों से तैयारी कर रहे छात्रों ने कहा कि परीक्षा रद्द होने से उन्हें गहरा झटका लगा और उन्हें फिर से ज़ोर-शोर से तैयारी के दौर में लौटना पड़ा।
इस साल कक्षा 12 की बोर्ड बोर्ड परीक्षा और नीट में शामिल हुईं रिधिमा बंसल ने कहा कि प्रवेश परीक्षा रद्द होने से वह भावनात्मक रूप से टूट गई हैं और उन्हें अपनी पढ़ाई दोबारा शुरू करने में मुश्किल हो रही है।
बंसल ने ‘पीटीआई-भाषा’से कहा, ‘‘मुझे अच्छे अंक मिलने की उम्मीद थी, जिससे मुझे चिकित्सा पाठ्यक्रम में प्रवेश मिल जाता। नीट देकर परीक्षा केंद्र से निकलने पर मैं खुश और आश्वस्त थी कि मुझे चिकित्सा महाविद्याल में प्रवेश मिल जाएगा। तभी अचानक खबर आई कि परीक्षा रद्द कर दी गई है।’’
बंसल ने कहा, ‘‘जब मैंने अपनी किताबें दोबारा खोलीं, तो मेरा पढ़ने का मन नहीं कर रहा था।’’ उन्होंने यह भी कहा कि इस अनिश्चितता ने उनकी रोज़मर्रा की दिनचर्या और मानसिक सेहत पर भी असर डाला है।
बंसल ने कहा, ‘‘फिर से रात-भर जागकर पढ़ाई करने का सिलसिला शुरू होने से नींद की समस्याएं होने लगी हैं। परीक्षा के बाद मैं चैन से सो पा रही थी। अब फिर से वही दिनचर्या शुरू हो गई है, रात तीन बजे सोना, सुबह सात बजे उठना, कक्षा में जाना, मॉक टेस्ट देना और फिर पढ़ाई करना। इससे मानसिक सेहत पर असर पड़ रहा है। मेरा कुछ खाने का भी मन नहीं करता।’’
उन्होंने कहा कि इस विवाद ने परीक्षा प्रणाली में उनके भरोसे को भी कम कर दिया है।
बंसल ने सवाल किया, ‘‘भरोसा खत्म हो गया है क्योंकि जब खबर आई, तो एनटीए (राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी)कह रहा था कि बस कुछ ही सवाल लीक हुए थे। लेकिन अगर कुछ सवाल भी लीक हुए, तो वह भी प्रश्नपत्र लीक ही है। कुछ सवाल भी लीक क्यों होने चाहिए?’’उन्होंने साफ तौर पर कहा, ‘‘ मैं अब व्यवस्था पर विश्वास नहीं करती।’’
एनटीए ने अभ्यर्थियों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर प्रतिक्रिया मांगने पर कोई जवाब नहीं दिया।
एक अन्य अभ्यर्थी वैभवी (17) ने बताया कि वह परिवार के साथ छुट्टियां मना रही थी, तभी उन्हें जानकारी मिली कि परीक्षा रद्द कर दी गई है और इसे दोबारा आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षा रद्द होने से मैं निराश हो गई थी। मैं परिवार के साथ छुट्टियां मना रही थी, तभी मुझे सूचना मिली कि परीक्षा रद्द कर दी गई है और इसे दोबारा आयोजित किया जाएगा। यह सुनकर मैं घबरा गई कि अब क्या होगा।’’
वैभवी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण ने उनके ध्यान और प्रेरणा को प्रभावित किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘अब मेरा पढ़ने का मन नहीं करता। यह तो बस एक मखौल जैसा लगता है। आप जितना चाहें उतना पढ़ लें, लेकिन उससे कुछ खास फ़ायदा नहीं होने वाला।’’
वैभवी ने कहा,‘‘पढ़ाई करते समय मेरा ध्यान भटकता है और मैं यही सोचती रहती हूं कि अब क्या होगा। मैं पूरी तरह से खो जाती हूं और अपने आस-पास की किसी भी चीज पर ध्यान नहीं देती।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ तीन मई की परीक्षा के बाद एक विराम था और फिर अचानक हमें दोबारा तैयारी शुरू करनी पड़ी। एक बार जब वह निरंतरता टूट जाती है, तो उसी लय में वापस आना मुश्किल हो जाता है।’’
वैभवी ने भी आने वाली परीक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा, ‘‘मेरी योजना करीब 550 या 530 अंक लाने की थी ताकि मुझे सरकारी कॉलेज मिल सके। लेकिन सब कह रहे हैं कि दोबारा नीट बहुत कठिन होगा। मुझे लगता है कि प्रश्नपत्र कठिन होगा। इसलिए, मैं डरी हुई हूं।’’
दो साल से नीट की तैयारी कर रही माधुरी सुधीर शेलार ने कहा कि परीक्षा रद्द होने की जानकारी मिलने पर वह निराश हो गईं। उन्होंने कहा,‘‘मुझे बहुत दुख हुआ क्योंकि मैं दो साल से तैयारी कर रही थी। इतने लंबे समय तक इतनी मेहनत से पढ़ाई करने के बाद, यह खबर सुनना बहुत दर्दनाक था। बहुत बुरा लगा।’’’
स्नातक स्तर के चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नीट-यूजी तीन मई को हुई थी, लेकिन प्रश्नपत्र लीक के आरोपों के बाद एनटीए ने इसे 12 मई को रद्द कर दिया। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अभी इस मामले की जांच कर रही है और दोबारा परीक्षा 21 जून को होनी है।
मनोवैज्ञानिक भावना बारमी ने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे उन चीज़ों पर ध्यान दें जो उनके नियंत्रण में हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘परीक्षाएं जल्द ही होने वाली हैं, इसलिए अभ्यर्थी अपनी बेचैनी को नियंत्रित करने का प्रयास करें।’’
बरमी ने अभ्यर्थियों को रोज़ाना पढ़ाई का छोटा और व्यवस्थित दिनचर्या अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया, ताकि उन्हें पढ़ाई का ज़्यादा बोझ महसूस न हो।
अभ्यर्थियों का हौसला बढ़ाते हुए बरमी ने कहा, ‘‘एक असफलता से उनके पूरे सफर का फ़ैसला नहीं होता। यह तो बस रास्ते का एक मोड़ है, और उन्हें इसे इसी नज़रिए से देखना चाहिए।’’
इस बीच, दिल्ली अभिभावक संघ (डीपीए)की अध्यक्ष अपराजिता गौतम ने कहा कि नीट-यूजी से जुड़े विवाद ने परीक्षा प्रणाली के प्रति छात्रों का अविश्वास और बढ़ा दिया है, खासकर इसलिए क्योंकि यह विवाद अन्य प्रमुख परीक्षाओं में गड़बड़ी की खबरों के बीच सामने आया है।
उन्होंने कहा,‘‘जब बच्चे सोशल मीडिया पर एक के बाद एक मुद्दे देखते हैं, तो उन्हें लगने लगता है कि व्यवस्था खराब हो गई है।’’
गौतम ने कहा कि बार-बार होने वाले विवादों ने उम्मीदवारों और माता-पिता, दोनों के मन में अनिश्चितता का माहौल बना दिया है।
भाषा धीरज माधव
माधव