भूजल के अत्यधिक दोहन के निवारण के लिए एनजीटी ने पैनल गठित किया

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भूजल के अत्यधिक दोहन के निवारण के लिए एनजीटी ने पैनल गठित किया

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  • Publish Date - April 27, 2026 / 07:33 PM IST,
    Updated On - April 27, 2026 / 07:33 PM IST

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने देश भर में भूजल के अत्यधिक दोहन की समस्या के निवारण के लिए एक पैनल का गठन किया है, साथ ही उसने कहा कि भूजल के क्षरण को रोकने के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों का प्रभावी ढंग से कार्यान्वयन नहीं किया गया है।

हरित अधिकरण सिंधु गंगा नदीघाटी के कुछ क्षेत्रों के भूजल क्षय के चरम बिंदु को पार करने और पूरे उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में 2025 तक भूजल की उपलब्धता में गंभीर कमी आने के पूर्वानुमान से संबंधित एक मामले की सुनवाई कर रहा था।

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्यों ए सेथिल वेल और अफरोज अहमद की पीठ ने 23 अप्रैल को जारी एक आदेश में कहा कि भारत के केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) द्वारा महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मुद्दे के संबंध में प्रदान की गई जानकारी का सारांश प्रस्तुत किया है।

पीठ ने कहा, ‘‘संक्षिप्त जानकारी से पता चलता है कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके अधिकारियों की ओर से भूजल के अवैध दोहन को रोकने और भूजल स्तर के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे चले जाने पर उसके पुनर्भरण को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में चूक हुई है।’’

मामले की अगली कार्यवाही के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की गई है।

भाषा शोभना वैभव

वैभव