नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को अयोग्यता के खिलाफ बीआरएस विधायक दानम नागेंद्र की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह ‘‘आया राम, गया राम’’ का मामला है।
नागेंद्र ने शीर्ष अदालत में तेलंगाना उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसके तहत सत्तारूढ़ कांग्रेस में शामिल होने के बाद उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने इस साल मार्च में विधानसभा अध्यक्ष के उस आदेश को निरस्त कर दिया था, जिसमें उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश, न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं है।
न्यायमूर्ति बागची ने मौखिक टिप्पणी में कहा, ‘‘आपका मामला ‘आया राम, गया राम’ का है।’’
वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी बीआरएस विधायक की ओर से पेश हुए।
उच्च न्यायालय ने खैराताबाद के विधायक नागेंद्र को 23 अप्रैल, 2024 से तेलंगाना विधानसभा के सदस्य के तौर पर अयोग्य घोषित कर दिया था, क्योंकि बीआरएस के विधायक रहते हुए उन्होंने 2024 में कांग्रेस के टिकट पर सिकंदराबाद लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था।
अदालत ने विधानसभा में भाजपा के सदन नेता अलेटी महेश्वर रेड्डी और बीआरएस के पी. कौशिक रेड्डी की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
याचिकाकर्ताओं ने अध्यक्ष के आदेश को रद्द करने और यह घोषित करने का अनुरोध किया था कि नागेन्द्र को 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन हलफनामा दाखिल करने की तारीख से दसवीं अनुसूची की धारा 2(1)(ए) के तहत विधायक के तौर पर अयोग्य ठहराया जाए।
तेलंगाना विधानसभा के अध्यक्ष गड्डम प्रसाद कुमार ने 11 मार्च को नागेंद्र को विधायक पद से अयोग्य ठहराने की मांग वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया था।
भाषा नेत्रपाल मनीषा
मनीषा