Bengal SIR Latest News: सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में बढ़ाई वोटर लिस्ट की डेडलाइन, अब इस तारीख को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची, DGP को भी नोटिस जारी

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सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में बढ़ाई वोटर लिस्ट की डेडलाइन, Supreme Court extends voter list deadline in Bengal

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  • Publish Date - February 9, 2026 / 11:16 PM IST,
    Updated On - February 10, 2026 / 12:07 AM IST

नई दिल्ली। Bengal SIR Latest News सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया (ECI) द्वारा चलाए जा रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान के तहत अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की समय-सीमा एक सप्ताह के लिए बढ़ा दी है। पहले यह सूची 14 फरवरी को जारी होनी थी। साथ ही, रिवीजन प्रक्रिया के दौरान हिंसा के आरोपों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) और असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (AEROs) को दस्तावेजों की जांच और सही निर्णय लेने के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता है, इसी कारण समय-सीमा बढ़ाई गई है। र्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया कि वह मंगलवार शाम 5 बजे तक SIR प्रक्रिया में तैनात किए जाने वाले 8,505 अधिकारियों की सूची पेश करे। अदालत ने ECI को यह अधिकार भी दिया कि वह जरूरत पड़ने पर EROs और AEROs को बदल सके या इन अधिकारियों की सेवाएं लेकर उन्हें प्रशिक्षण देकर प्रक्रिया में सहायता के लिए तैनात कर सके। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय लेने का अधिकार केवल EROs के पास ही रहेगा।

सुनवाई के दौरान ECI की ओर से दाखिल काउंटर-एफिडेविट में आरोप लगाया गया कि शिकायतों के बावजूद फॉर्म-7 (आपत्ति प्रपत्र) और अन्य दस्तावेज जलाने जैसी घटनाओं में शामिल लोगों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने DGP से जवाब मांगा है और कहा है कि उनके स्पष्टीकरण के बाद ही ECI की शक्तियों की सीमा पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। ख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में 7.08 करोड़ वोटरों में से 6.75 करोड़ का मैपिंग हो चुका है, जबकि करीब 32 लाख वोटर बिना मैप किए रह गए। उन्होंने यह भी कहा कि मैप किए गए वोटरों में से लगभग 1.36 करोड़ नाम मामूली स्पेलिंग या स्थानीय बोली के अंतर के कारण ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी लिस्ट’ में डाल दिए गए हैं।

राज्य सरकार ने दी ये दलील

Bengal SIR Latest News राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने दलील दी कि राज्य ने सहयोग की पेशकश की थी, लेकिन इसके बावजूद ECI ने बंगाल के बाहर से माइक्रो-ऑब्जर्वर नियुक्त किए, जो स्थानीय भाषा और प्रशासनिक व्यवस्था से परिचित नहीं थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशिक्षित राज्य अधिकारियों को दरकिनार किया गया। इन दलीलों पर जवाब देते हुए चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि माइक्रो-ऑब्जर्वर केवल EROs और AEROs की सहायता के लिए हैं, वे स्वयं कोई निर्णय नहीं ले सकते। सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को जारी रखने और उपरोक्त निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित कई याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिनमें पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और वोटरों के नाम गलत तरीके से सूचीबद्ध किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।

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