हरियाणा के तीन पुलिसकर्मियों पर हिरासत में एक व्यक्ति की पिटाई करने का मामला दर्ज

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हरियाणा के तीन पुलिसकर्मियों पर हिरासत में एक व्यक्ति की पिटाई करने का मामला दर्ज

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  • Publish Date - July 6, 2026 / 08:31 PM IST,
    Updated On - July 6, 2026 / 08:31 PM IST

कुरुक्षेत्र, छह जुलाई (भाषा) पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के साथ कथित मारपीट के मामले में लाडवा थाने के तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को पुलिसकर्मियों द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने के आरोप या शिकायतकर्ता के हड्डी के कैंसर से पीड़ित होने के दावे के समर्थन में कोई साक्ष्य नहीं मिला।

पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि आरोप सामने आने के बाद प्राथमिकी दर्ज की गई और निष्पक्ष जांच के लिए लाडवा के पुलिस उपाधीक्षक की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया गया।

उन्होंने बताया कि पिछले 15 दिनों में की गई जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, फोरेंसिक जांच, डीएनए परीक्षण तथा अन्य वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया गया।

पुलिस अधीक्षक के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 17-18 जून की दरम्यानी रात शराब पी रखी थी और कथित तौर पर नाका जांच के दौरान पुलिसकर्मियों से बहस की। बाद में थाने लाए जाने पर उसने वहां भी हंगामा किया।

उन्होंने बताया कि इसके बाद शिकायतकर्ता को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 172 के तहत हिरासत में लिया गया।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज से पता चला है कि शिकायतकर्ता पूरी रात हवालात के भीतर ही रहा। वह केवल 10 मिनट के लिए बाहर निकला था।

उन्होंने कहा कि इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ हुई बहस के बाद कुछ पुलिसकर्मियों ने आपा खो दिया और शिकायतकर्ता के साथ मारपीट की।

उन्होंने बताया कि मारपीट में कथित रूप से शामिल पाए गए तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

हालांकि, एसआईटी की जांच में हिरासत में यौन उत्पीड़न के आरोपों की पुष्टि के लिए कोई साक्ष्य नहीं मिला।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि जांच के दौरान लिए गए स्वैब नमूनों और कपड़ों की डीएनए जांच में यौन उत्पीड़न के कोई संकेत नहीं मिले।

उन्होंने कहा कि आरोपित सभी पुलिसकर्मियों ने स्वेच्छा से लाई डिटेक्टर (पॉलीग्राफ) परीक्षण कराया और उसके परिणामों ने उनके इन आरोपों से इनकार का समर्थन किया।

उन्होंने बताया कि शिकायतकर्ता को भी लाई डिटेक्टर परीक्षण कराने का प्रस्ताव दिया गया था, लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया।

पुलिस अधीक्षक ने कहा कि शिकायतकर्ता ने शुरुआत में चिकित्सकीय परीक्षण कराने से इनकार किया था, हालांकि बाद में विधिवत गठित चिकित्सा बोर्ड ने उसकी जांच की।

उन्होंने यह भी कहा कि जांच में ऐसा कोई चिकित्सकीय रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि शिकायतकर्ता हड्डी के कैंसर से पीड़ित था या उसने कीमोथेरेपी कराई थी।

रक्तस्राव के आरोपों पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि फोरेंसिक जांच और सीसीटीवी फुटेज में हवालात, थाने के कमरों या घटना वाली रात शिकायतकर्ता के कपड़ों पर खून के कोई निशान नहीं मिले।

पुलिस अधीक्षक ने बताया कि चिकित्सा बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि अगली सुबह देखा गया रक्तस्राव पहले से मौजूद गुदा विदर (एनल फिशर), कब्ज और बवासीर की समस्या के कारण हुआ था, न कि मारपीट या यौन उत्पीड़न के कारण।

उन्होंने कहा कि जांच में कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा शिकायतकर्ता के साथ मारपीट किए जाने की पुष्टि हुई है, लेकिन हिरासत में यौन उत्पीड़न या शिकायतकर्ता के हड्डी के कैंसर से पीड़ित होने के दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक या चिकित्सकीय साक्ष्य नहीं मिला।

पुलिस अधीक्षक ने मीडिया से भी संवेदनशील आपराधिक मामलों की खबरें प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले तथ्यों का सत्यापन करने और संयम बरतने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अपुष्ट खबरों से संबंधित व्यक्तियों और उनके परिवारों की प्रतिष्ठा तथा सामाजिक जीवन को नुकसान पहुंच सकता है।

भाषा

राखी माधव

माधव