बेंगलुरु, 11 जून (भाषा) कर्नाटक के ग्रामीण विकास मंत्री ईश्वर खंड्रे ने बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह नई ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (वीबी-जी राम जी) के तहत मजदूरी लागत में केंद्र और राज्य के बीच हिस्सेदारी अनुपात को कम से कम 80:20 तक बढ़ाए। नई योजना ने ‘एमजीएनआरईजीए’(मनरेगा) का स्थान लिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार का इस नई योजना के तहत साल में 60 दिन रोजगार न देने का निर्णय ‘न तो सही है और न ही न्यायसंगत।’
खंड्रे ने कहा, ‘‘वर्ष 2006 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार द्वारा शुरू किए गए मनरेगा के तहत, केंद्र सरकार मजदूरी लागत का 90 प्रतिशत वहन करती थी, जबकि राज्य सरकारें केवल 10 प्रतिशत का योगदान देती थीं। लेकिन, भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार द्वारा एक जुलाई से लागू की जाने वाली नई वीबी-जी राम जी योजना के तहत, केंद्र 60:40 के अनुपात में धनराशि प्रदान करेगा, जिससे राज्य सरकारों पर अधिक वित्तीय बोझ पड़ेगा।’’
उन्होंने यहां पत्रकारों से बात करते हुए मांग की कि पहले वाला 90:10 का अनुपात बहाल किया जाए, या कम से कम बढ़ाकर 80:20 किया जाए।
मंत्री ने कहा, ‘‘आधुनिक युग में कृषि कार्य तेजी से मशीनीकृत हो गया है, और कई भूमिहीन ग्रामीण मजदूर रोजगार पाने में असमर्थ हैं।’’
उन्होंने केंद्र से 60 दिन के अवकाश के प्रस्ताव को वापस लेने का आग्रह किया, क्योंकि रोजगार गारंटी योजना भूमिहीन कृषि मजदूरों के लिए एक महत्वपूर्ण सहायता प्रणाली है।
खंड्रे ने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में 28 और 29 जून को सभी राज्यों के ग्रामीण विकास मंत्रियों की बैठक होगी। उन्होंने कहा कि वह उस बैठक में मजदूरी लागत में केंद्र की हिस्सेदारी में वृद्धि करने और प्रस्तावित 60 दिन के रोजगार अवकाश को वापस लेने पर जोर देंगे।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि वीबी-जी राम जी योजना के तहत, केंद्र को राज्यों द्वारा किए जा सकने वाले कार्यों के प्रकार पर प्रतिबंध नहीं लगाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्यों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रोजगार परियोजनाओं का चयन करने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
भाषा संतोष माधव
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