MP Transfer Politics News/Image Credit: IBC24.in
MP Transfer Politics News: भोपाल: मध्यप्रदेश में 15 जून की डेडलाइन से ठीक पहले ट्रांसफर का पावर सेंटर अचानक बदल गया। बीजेपी संगठन ने साफ कर दिया है कि प्रभारी मंत्रियों की मर्जी या उनके स्टाफ की पर्ची पर अब ट्रांसफर लिस्ट फाइनल नहीं होगी। अब जिलों में होने वाले हर एक तबादले का रूट अब जिला कोर ग्रुप की चौखट से होकर ही गुजरेगा।
जानकारों की मानें तो इस बड़े फैसले के पीछे बीजेपी विधायकों सांसदों और जमीनी कार्यकर्ताओं का आक्रोश है, जो पिछले कई दिनों से उबल रहा था, सरकार ने मंत्रियों को अधिकार तो दिए, लेकिन मंत्रियों के स्टाफ ने विधायकों की सिफारिशों को रद्दी की टोकरी में डालना शुरू कर दिया था। इससे जिला संगठन और विधायकों सांसदों में असंतोष बढ़ रहा था। (MP Transfer Politics News) कई बार तबादलों के माध्यम से मंत्रियों के करीबी लोगों को लाभ पहुंचाया जाता है, अपनों की अनदेखी से नाराज जिला संगठन के पदाधिकारियों ने जब सीधे ऊपर शिकायत दर्ज कराई, तो संगठन को यह सर्जिकल स्ट्राइक करनी पड़ी।
MP Transfer Politics News: इन सबके बीच बीजेपी तर्क दे रही है तबादले मंत्रियों के जरिये नियम प्रक्रिया से ही हो रहे, तो विपक्ष बदलाव को असली तबादला उद्योग का नाम देकर सवाल उठा रही है।
जाहिर है 15 जून से सूबे में नई तबादला नीति लागू होने वाली थी, लेकिन इस नीति में बदलाव कर बीजेपी संगठन ने एक तीर से दो शिकार किए। पहला पार्टी के कार्यकर्ताओं और विधायकों में पनप रहे असंतोष को शांत कर दिया, और दूसरा मंत्रियों को ये संदेश दे दिया कि सरकार कितनी भी ताकतवर हो, सुपर बॉस संगठन ही रहेगा। (MP Transfer Politics News) अब सवाल है कि आखिर ट्रांसफर का रिमोट किसके हाथ रहेगा?
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