रायपुरः Cleanliness survey for 2026 released एक बार फिर 2026 के लिए स्वच्छता सर्वे की तैयारी के बीच शहरों से लेकर कस्बों तक नगर सरकारों के सामने कई चुनौतिया हैं। सत्तापक्ष का दावा है पूरी तैयारी है। विपक्ष का आरोप है- सब खोखला और दिखावा है। बजट, कर्मचारी हड़ताल, अधूरे प्रोजेक्ट और इंटरनल पॉलिटिक्स के शिकार निगमों से रैंक पाने की आस कितनी जायज है?
Cleanliness survey for 2026 released एक तरफ देश-प्रदेश में स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 की तैयारियां जारी हैं। राजधानी में मुख्य सड़कों पर रंग-रोगन, सौंदर्यीकरण के कार्य हो रहे हैं तो वार्डों का बुरा हाल है क्योंकि सफाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इन हालात के लिए पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री शिव डहरिया ने मौजूदा सरकार को जिम्मेदार बताया। डहरिया का आरोप है कि 7 महीनों से कचरा प्रबंधन करने वाली रामकी कंपनी का 78 करोड़ बकाया है, भूपेश सरकार में 3 साल तक हम स्वच्छता में टॉप पर रहे, कभी हड़ताल ना हुई लेकिन मौजूदा सरकार के वक्त अकेले रायपुर में ही 4 बार हड़ताल हो गई। सीनियर बीजेपी नेता संजय श्रीवास्तव ने आरोपों पर पलटवार किया।
उधर, न्यायधानी बिलासपुर के कई वार्डों, खासकर आउटर इलाकों में कचरा कलेक्शन नियमित नहीं है, नालियां जाम हैं सड़कों पर कचरे के ढेर हैं। ये सब तब है जब निगम का दावा है कि 70 वार्डों में कचरा उठाने के लिए 150 से ज्यादा टिपर लगे हैं। दूसरी तरफ विपक्ष सवाल उठा रहा है कि बिलासपुर की ‘स्वच्छता पेट्रोलिंग सेवा’ जिसने पिछली बार 2 रैंक दिलाया था वो फिलहाल मेयर पति से विवाद के बाद बंद करा दी गई है। इधर, रायगढ़ नगर निगम पिछले 2 सालों से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाया है, दावा है पूरा फोकस बेहतर रैंकिंग पर है, अभी चौक-चौराहों,वॉल पेंटिंग,ब्रिज रिनोवेशन पर 60 लाख रुपए खर्च किए जा रहे। हालांकि विपक्ष में इसे फिजूल खर्ची बता रहा, जबकि अम्बिकापुर नगर निगम जो 2017 से 2020 तक अपनी कैटेगरी में देश में अव्वल रहा इस बार, निगम के सामने कुल अंकों का 80% अंक अर्जित करने की चुनौती है, जिसे लेकर कुछ खास पहल की जा रही हैं। कुल मिलाकर प्रदेश के शहरों के लिए 2026 स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंक बना पाना चैलेंजिंग बना हुआ है, उस पर कर्मचारियों की हड़ताल और राजनीति सवाल उठा रही है।