भोपालः Rajiv Gandhi Technological University मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी के एफिलियेशन में कई मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज जुड़े हैं। कुछ विवादों में भी इसका नाम उछलता रहा है, लेकिन अचानक से ये बहुत तेज़ चर्चा में इसलिए आ गई कि मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव इसका नाम बदलना चाहते हैं। सिर्फ नाम ही नहीं बदलने का नहीं बल्कि इसे तीन हिस्से मालवा, महाकौशल और मध्य भारत में करने के निर्देश सीएम ने दिए हैं। कांग्रेस इसे लेकर मुखर हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करके विरोध जताया और कहा कि राजीव गांधी के देश के लिए किये योगदान को भुलाना यूँ आसान नहीं होगा। कांग्रेस कह रही है कि वो ईंट का जवाब पत्थर से देगी और प्रदेश भर में आन्दोलन करेगी
Rajiv Gandhi Technological University चूंकि ये कॉल ख़ुद मुख्यमंत्री का था और उन्होंने अधिकारियों को इस बारे में निर्देश भी डे दिए, तो तय है कि भाजपा फ़ौरन समर्थन में खड़ी हुई। भाजपा कह रही है कि कांग्रेस सरकारों में 900 से ज्यादा योजनाएं एक ही खानदान के नाम पर रहीं। महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसे महापुरुषों को भी भुला दिया गया। समय की जरूरत के हिसाब से जो जरूरी होगा, सरकार करेगी।
क़ाबिल-ए-गौर बात ये है कि जबसे मोहन यादव सीएम बने हैं, अब तक 68 गांवों और पंचायतों के नाम बदल चुके हैं। कुछ और मांग भी नाम बदलने की पेंडिंग हैं।सवाल ये है कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने से उसकी गुणवत्ता में क्या असर होगा? अभी यूनिवर्सिटी अपने खर्चों की तुलना में आय ठीक-ठाक कर ले रही है। तीन हिस्सों में काटने पर इसका बढ़ा हुआ खर्च क्या अनावश्यक नहीं होगा? सवाल ये भी कि क्या वाकई नाम बदलने के पीछे वजह राजीव गांधी ही हैं या कुछ और भाव है सीएम का?