इंदौर, एक जुलाई (भाषा) मध्यप्रदेश के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव को लिखे कथित पत्र को लेकर बुधवार को राजनीतिक सरगर्मियां तेज रहीं जिसमें उन्होंने चेताया कि अगर इंदौर के विकास से जुड़े विषयों का समाधान नहीं होता है, तो उन्हें शहर की जनता की आवाज सार्वजनिक मंच पर उठाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कथित पत्र में विजयवर्गीय ने विकास परियोजनाओं में इंदौर की अनदेखी का दावा करते हुए कहा कि पिछले ढाई वर्षों में उन्हें ‘असहयोग, उपेक्षा और विरोध’ ही मिला है, जबकि कांग्रेस ने इसे सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं की ‘आपसी खींचतान का दुष्परिणाम’ बताया।
इस बीच, स्थानीय लोकसभा सदस्य शंकर लालवानी ने मुख्यमंत्री यादव के तीन जुलाई को इंदौर के विकास पर केंद्रित एक विशेष कार्यक्रम में शामिल होने की घोषणा की, लेकिन चंद घंटे बाद इसे मुख्यमंत्री की व्यस्तता का हवाला देते हुए स्थगित कर दिया गया।
प्रदेश कांग्रेस इकाई ने हिन्दी अखबार ‘दैनिक भास्कर’ में विजयवर्गीय के कथित पत्र के अंशों वाली खबर की क्लिपिंग बुधवार को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सत्तारूढ़ दल पर निशाना साधा। हालांकि, मीडिया के बार-बार पूछे जाने के बावजूद काबीना मंत्री ने कथित पत्र के बारे में स्पष्ट तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
हिन्दी दैनिक की खबर के मुताबिक विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री यादव को 20 जून को लिखे कथित पत्र में इंदौर के मास्टर प्लान में देरी, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र में इंदौर का नाम पीछे करने और अन्य विकास परियोजनाओं के मुद्दे उठाते हुए कहा,‘‘प्रदेश के मुखिया और मेरे गृह जिले के प्रभारी मंत्री होने के नाते मुझे आपसे सहयोग की अपेक्षा थी, परंतु मुझे पिछले ढाई वर्षों में असहयोग, उपेक्षा व विरोध ही मिला है।’’
कथित पत्र में कहा गया है, ‘‘मेरे विभाग के स्थानांतरण मेरी जानकारी के बिना कर दिए जाते हैं। इंदौर के विकास की गति बढ़ाना तो दूर, उसे न्यायोचित हक भी नहीं मिल पा रहा। यदि इन विषयों का समाधान नहीं होता है, तो इंदौर की जनता की आवाज को सार्वजनिक मंच पर उठाना मेरी विवशता होगी।’’
राज्य के वरिष्ठ भाजपा नेताओं में गिने जाने वाले विजयवर्गीय के पास नगरीय विकास एवं आवास और संसदीय कार्य विभाग हैं।
कथित पत्र के बारे में हिन्दी दैनिक में छपी खबर के बारे में पूछे जाने पर विजयवर्गीय ने बुधवार सुबह संवाददाताओं से कहा,’आपको पता नहीं कहां से इस पत्र की जानकारी मिली है। आप उस समाचार पत्र वालों से ही पूछिए कि यह (पत्र) कहां से आया है और यह सही है या गलत?’
काबीना मंत्री से जब संवाददाताओं ने कथित पत्र के बारे में बुधवार रात एक बार फिर सवाल किया, तो उन्होंने सीधा जवाब टालते हुए कहा,’वह (मामला) तो खत्म हो गया। अध्याय ही बंद हो गया।’’
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने विजयवर्गीय के कथित पत्र को भाजपा सरकार की विफलता व अंदरूनी कलह का ‘सार्वजनिक प्रमाण’ करार दिया और कहा कि मुख्यमंत्री को पत्र में उठाए गए प्रत्येक मुद्दे पर सामने आकर जवाब देना चाहिए।
कथित पत्राचार को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने के बीच, लोकसभा सदस्य लालवानी ने कहा कि मुख्यमंत्री यादव शहर में दो दिन बाद आयोजित विशेष संवाद कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करेंगे जिसे ‘मध्यप्रदेश की उम्मीदों का शहर-इंदौर’ का नाम दिया गया है।
उन्होंने कहा,‘‘इस कार्यक्रम में राज्य के दो मंत्री-कैलाश विजयवर्गीय और तुलसीराम सिलावट भी शामिल होंगे।’’
लालवानी ने कहा कि यह कार्यक्रम ‘डबल इंजन सरकार’ के राज में इंदौर के ‘तेज रफ्तार विकास’ पर केंद्रित होगा।
इस बयान के चंद घंटे बाद लोकसभा सदस्य ने कहा कि मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण यह ‘पूर्व निर्धारित कार्यक्रम’ स्थगित कर दिया गया है और इसकी नयी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।
प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और कांग्रेस के कई अन्य नेताओं ने विजयवर्गीय के कथित पत्र को लेकर भाजपा में गुटबाजी का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भाजपा नेताओं की कथित आपसी खींचतान का दुष्परिणाम सूबे की जनता भुगत रही है।
प्रदेश कांग्रेस इकाई ने विजयवर्गीय के कथित पत्र के बारे में सोशल मीडिया पर कहा,’गुरु गुड़ रह गए, चेले शक्कर बन गए ! मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को आखिरकार मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इंदौर के विकास की उपेक्षा का जिक्र करना ही पड़ा। सत्ता और प्रभुत्व की इस लड़ाई में मरण जनता का हो रहा है।’
भाषा हर्ष
अमित
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