Reported By: Vishal Vishal Kumar Jha
,Chhatisgarh High Court on Religious Freedom Act / Image Source : FILE
बिलासपुर :Chhatisgarh High Court on Religious Freedom Act : छत्तीसगढ़ के हाईकोर्ट ने प्रदेश में नए लागू हुए छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के क्रियान्वयन और प्रवर्तन पर एकतरफा अंतरिम रोक लगाने की मांग करने वाली एक रिट याचिका को खारिज कर दिया है।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता द्वारा केस वापस लेने की अनुमति मांगने पर डिवीजन बेंच ने इसे “बिना किसी स्वतंत्रता” भविष्य में दोबारा इसी मुद्दे पर याचिका न लगाने की शर्त के वापस मानकर खारिज कर दिया है। मामले में चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डीबी में सुनवाई हुई।
Chief Justice Ramesh Sinha Judgement Freedom Of Religion Bill याचिका भिलाई (दुर्ग) के हाउसिंग बोर्ड निवासी मोसेस लोगन द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट से गुहार लगाई थी कि कोर्ट छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम 2026 के संचालन, प्रारंभ और प्रवर्तन पर पूर्ण रूप से एकतरफा अंतरिम रोक लगा दे। इस नए कानून के लागू होने और इसकी वैधानिकता को लेकर यह याचिका दायर की गई थी। याचिका में उठाया गया मुद्दा अब कानूनन नया नहीं रह गया है।
इससे पहले भी इसी नए अधिनियम को चुनौती देने वाली दो अलग-अलग याचिकाएं हाई कोर्ट के समक्ष आ चुकी हैं। महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन दोनों याचिकाओं को इसी डिवीजन बेंच ने 24 अप्रैल 2026 और 8 मई 2026 को समयपूर्व मानते हुए पहले ही खारिज कर दिया है। राज्य शासन के इस कड़े रुख और पुराने फैसलों के रिकॉर्ड को देखते हुए याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अमन प्रसाद ने मामले को आगे बढ़ाने के बजाय कोर्ट से इस रिट याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी।
महाधिवक्ता ने इस पर अपनी सहमति देते हुए कहा कि यदि याचिकाकर्ता केस वापस लेना चाहता है, तो शासन को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। दोनों पक्षों के बयानों को दर्ज करते हुए मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है, इस रिट याचिका को बिना किसी आगामी विधिक स्वतंत्रता के वापस लेते हुए खारिज किया जाता है।