jabalpur bridge/ image source: IBC24
Jabalpur NH 45 Bridge Collapse: जबलपुर: मध्यप्रदेश के जबलपुर से भोपाल को जोड़ने वाली नेशनल हाईवे 45 पर रविवार को शाहपुरा ब्रिज का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। हादसे के समय सौभाग्य रहा कि उस स्थान पर कोई वाहन नहीं था, अन्यथा बड़ा नुकसान हो सकता था। गिरा हुआ हिस्सा देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे किसी भूकंप के कारण जमीन धंस गई हो। यह ब्रिज रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बना है और उसकी स्थिति अब काफी खतरनाक हो गई है। दिसंबर महीने में इसी ब्रिज का दूसरा हिस्सा भी टूटकर गिरा था, जिसके बाद उस हिस्से की मरम्मत का काम चल रहा था।
ब्रिज के टूटने के बाद वाहनों को शाहपुरा के अंदर से डायवर्ट किया गया। कुछ वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से निकालना पड़ा। यह ब्रिज जबलपुर से लगभग 30-35 किलोमीटर दूर है और निर्माण के केवल पांच साल बाद ही इस तरह ढहने की घटना सामने आई। दिसंबर में टूटे हिस्से की मरम्मत जारी थी, लेकिन जिस हिस्से पर वाहन चल रहे थे, वहीं रविवार को भरभराकर गिर गया। गिरा हुआ हिस्सा ऊपर से देखने पर खाई जैसा प्रतीत हो रहा था और नीचे से यह बेहद खतरनाक दिखाई दे रहा था।
मध्य प्रदेश –
जबलपुर–भोपाल नेशनल हाईवे पर रेलवे क्रॉसिंग के ऊपर बने ब्रिज का एक हिस्सा नीचे धंस गया। इसी ब्रिज की दूसरी लेन का हिस्सा 3 महीने पहले क्षतिग्रस्त हुआ था। ब्रिज 3 साल पहले 400 करोड़ रुपए से बना था। pic.twitter.com/nRqCwf4z3H— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) February 23, 2026
जबलपुर में शाहपुरा ब्रिज का दूसरा हिस्सा दिसंबर में पहले ही भरभराकर गिर चुका था, जिसके बाद उस हिस्से की मरम्मत का काम चल रहा था और वहां से आवागमन पूरी तरह बंद था। अधिकारियों ने वाहन चलाने के लिए ब्रिज के दूसरे हिस्से को चालू रखा था, लेकिन रविवार को वही हिस्सा भी धंस गया और बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया। ऊपर से देखने पर यह खाई जैसा प्रतीत हो रहा था और नीचे से इसकी स्थिति अत्यंत खतरनाक दिखाई दे रही थी, जिससे वहां सुरक्षा गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
इस हाईवे का निर्माण मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MPRDC) की देखरेख में हुआ था। 54 किलोमीटर लंबे इस अंधमूक बायपास और फ्लाईओवर पर पैकेज-1 के तहत करीब 628.45 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। निर्माण कार्य नवंबर 2015 में शुरू हुआ और जनवरी 2020 में इसे पूरा घोषित किया गया। हैरानी की बात यह है कि ब्रिज अभी अपने गारंटी पीरियड में था, लेकिन सड़क पर बड़ी दरारें और अब ब्रिज का गिरना घटिया निर्माण सामग्री और घटिया निर्माण गुणवत्ता की ओर इशारा कर रहा है।
एनएच-45 पर ब्रिज निर्माण करने वाली एजेंसियों मेसर्स बागड़ इंफ्रा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और मेसर्स सोराठिया को खराब गुणवत्ता के कारण पिछले महीने ही ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इस हाईवे पर पिछले पांच सालों से टोल वसूल किया जा रहा था, लेकिन अभी तक इसे एनएचएआई को हैंडओवर नहीं किया गया। अधिकारियों के अनुसार, हैंडओवर न होने का कारण निर्माण गुणवत्ता की खामियां हैं, जिनका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।