sikshak bharti/ image source: IBC24
जबलपुर: मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी का मुद्दा अब हाईकोर्ट (HC) तक पहुँच गया है। डिंडोरी जिले के किसान लोक सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में बताया गया कि जिले के कई सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली होने के कारण शिक्षा प्रभावित हो रही है।
हाईकोर्ट ने इस मामले में चिंता जताते हुए राज्य सरकार से जवाब देने को कहा है। कोर्ट ने सरकार से हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि प्रदेश में कितने सरकारी स्कूल हैं और उनमें शिक्षकों के कितने पद खाली हैं।
लोक सिंह ने याचिका में बताया कि डिंडोरी जिले में 102 सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनमें कोई शिक्षक नहीं है, और इन स्कूलों में बच्चों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन और शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह स्थिति शिक्षा का अधिकार (Right to Education) कानून का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण उन्हें मूलभूत शिक्षा तक प्राप्त नहीं हो रही।
हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट कहा कि शिक्षकों की कमी गंभीर चिंता का विषय है, और इसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि खाली पदों को भरने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य सरकार को हर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की स्थिति का विवरण पेश करना होगा और यह बताना होगा कि पदों को जल्द भरने की क्या योजना है।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 के लिए निर्धारित की है। सुनवाई में यह देखा जाएगा कि सरकार ने कितनी प्रभावी कार्रवाई की है और स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। डिंडोरी जिले में शिक्षकों की कमी के कारण बच्चों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कई स्कूलों में बच्चों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है।