जबलपुर, 16 मई (भाषा) भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने शनिवार को कहा कि अब समय आ गया है जब न्यायपालिका को आम नागरिकों की आकांक्षाओं, जरूरतों, पीड़ा और समस्याओं का त्वरित समाधान देने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करना होगा।
उन्होंने कहा कि इसके लिए न्यायिक प्रणाली को 24 घंटे कार्यरत अस्पतालों की तरह कार्य करना होगा।
सीजेआई ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में समय की बर्बादी रोकने का सबसे प्रभावी उपाय प्रौद्योगिकी है और न्याय वितरण प्रणाली को तेज बनाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) तथा तकनीक आधारित ढांचे को और सशक्त करने की आवश्यकता है।
उन्होंने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा ‘फ्रैगमेंटेशन टू फ्यूजन: एम्पावरिंग जस्टिस वाया यूनाइटेड डिजिटल प्लेटफॉर्म इंटीग्रेशन’ नामक विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। इस अवसर पर उन्होंने उच्च न्यायालय के नव विकसित डिजिटल मंचों का लोकार्पण भी किया।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा, “भारतीय न्यायपालिका यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि 1990 से चली आ रही तकनीकी प्रगति के साथ-साथ नवीनतम एआई तकनीकों का भी अधिकतम उपयोग आम जनता के हित में किया जाए।”
सीजेआई ने कहा, “न्यायिक समय की बर्बादी का एकमात्र प्रभावी समाधान प्रौद्योगिकी ही है। हमें एआई आधारित न्यायिक ढांचे को और अधिक गहराई तक विकसित करना होगा।”
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि न्यायपालिका को लोगों की आकांक्षाओं, आवश्यकताओं, पीड़ा और समस्याओं का तत्काल समाधान प्रदान करने वाली प्रणाली के रूप में काम करना होगा, जिसके लिए इसे 24 घंटे सक्रिय रहने वाले अस्पतालों की तरह कार्य करना पड़ेगा।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कोविड-19 महामारी का उल्लेख करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी भारतीय न्यायपालिका ने अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया और वैश्विक स्तर पर सराहना प्राप्त की।
उन्होंने कहा कि महामारी के दौरान अदालतें बंद नहीं की गईं और आवश्यक मामलों की सुनवाई तकनीक के माध्यम से जारी रही।
सीजेआई ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा विकसित डिजिटल मंचों की सराहना करते हुए कहा कि केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी इन तकनीकी प्रगतियों को देशभर में लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
उन्होंने बताया कि मामलों के त्वरित निपटारे और न्यायिक व्यवस्था के लाभ को जनता तक पहुंचाने के लिए उच्चतम न्यायालय ने एआई के इस्तेमाल पर एक समिति का गठन किया है।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा ने भी अपने-अपने विचार रखे।
भाषा
सं, दिमो रवि कांत