MP High Court: 50 करोड़ की जमीन विवाद पर हाईकोर्ट बड़ा फैसला, सुनकर खरीददारों को लगेगा जोर का झटका… जानिए क्या कहा

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MP High Court: हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने कहा है कि केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स भरने से जमीन का मालिकाना हक नहीं मिलता।

  • Reported By: Nasir Gouri

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 11:17 AM IST,
    Updated On - June 18, 2026 / 11:17 AM IST

MP High Court/Image: IBC24 File

HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ रजिस्ट्री और नामांतरण मालिकाना हक का प्रमाण नहीं हैं
  • 50 करोड़ रुपये की मंदिर भूमि मामले में खरीदारों को अतिक्रमणकारी माना गया
  • वैध स्वामित्व के बिना कोई व्यक्ति जमीन बेच नहीं सकता

MP High Court: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने जमीन-जायदाद को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि सिर्फ रजिस्ट्री, नामांतरण और टैक्स भरने से कोई जमीन का मालिक नहीं बन जाता। दरअसल मामला अशोकनगर जिल के धनुधारी बांके देव मंदिर की 98 बीघा जमीन से जुड़ा है। इसकी अनुमानित कीमत 50 करोड़ रुपए है। रिकॉर्ड में ये जमीन मंदिर के नाम दर्ज थी।

प्रॉपर्टी टैक्स भरने से स्वामित्व नहीं मिलता

आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के बेटे कमलदास ने खुद को मालिक बताकर इस जमीन के प्लॉट काटे और कई लोगों को बेच दिए। खरीददारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और सालों तक टैक्स भी भरा। अशोकनगर जिला प्रशासन ने जांच में निर्माण को अवैध माना था। मकान मालिकों ने कोर्ट में प्रशासन के आदेश को चुनौती थी। जिसके बाद, मामला हाईकोर्ट पहुंचा… ओर कोर्ट ने कहा कि प्रॉपर्टी टैक्स भरने से स्वामित्व नहीं मिलता। नगर पालिका में नामांतरण भी मालिकाना हक का प्रमाण नहीं है। जिसके पास वैध स्वामित्व नहीं, वह जमीन बेच नहीं सकता।

खरीदारों को माना अतिक्रमणकारी

कोर्ट ने खरीदारों को अतिक्रमणकारी माना है। साथ ही कोर्ट ने हाई कोर्ट ने जमीन खरीदने वालों की याचिका को किया खारिज कर दी। ये फैसला उन लोगों के लिए सबक है जो सिर्फ रजिस्ट्री को मालिकाना हक समझते हैं। जमीन खरीदने से पहले मूल स्वामित्व जरूर जांच लें, वरना आपकी गाढ़ी कमाई डूब सकती है।

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हाईकोर्ट ने जमीन के मालिकाना हक को लेकर क्या कहा?

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल रजिस्ट्री, नामांतरण या प्रॉपर्टी टैक्स भरने से किसी व्यक्ति को जमीन का वैध मालिकाना हक नहीं मिलता।

मामला किस जमीन से जुड़ा है?

यह मामला अशोकनगर जिले के धनुधारी बांके देव मंदिर की लगभग 98 बीघा जमीन से जुड़ा है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है।

कोर्ट ने खरीदारों को अतिक्रमणकारी क्यों माना?

कोर्ट के अनुसार जिस व्यक्ति ने जमीन बेची, उसके पास वैध स्वामित्व नहीं था। इसलिए उसके द्वारा की गई बिक्री कानूनी रूप से वैध नहीं मानी गई।

क्या नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स मालिकाना हक साबित करते हैं?

नहीं। कोर्ट ने कहा कि नगर पालिका में नामांतरण और टैक्स भुगतान केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं हैं, ये स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं।

जमीन खरीदने से पहले किन बातों की जांच करनी चाहिए?

खरीदारों को मूल स्वामित्व रिकॉर्ड, राजस्व अभिलेख, पूर्व मालिकों की जानकारी और कानूनी दस्तावेजों की पूरी जांच करनी चाहिए।