(NSE IPO News/ Image Credit: ANI News)
नई दिल्ली: NSE IPO News: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ की राह में दिलचस्प मोड़ आ गए हैं। बाजार में हिस्सेदारी के मामले में सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज NSE ने करीब 20-21 प्रमुख इन्वेस्टमेंट बैंकों को शॉर्टलिस्ट किया है, जिसमें कोटक महिंद्रा, सिटी, जेपी मॉर्गन और HSBC जैसे दिग्गज शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार, इस आईपीओ के लिए 7-9 लॉ फर्म्स को भी चयनित किया गया है। यह आईपीओ देश के सबसे बड़े वित्तीय घटनाओं में से एक बन सकता है।
सूत्रों का कहना है कि जल्द ही NSE अपने मेगा IPO से जुड़ी आधिकारिक घोषणा करेगा। इससे पहले, फरवरी में NSE ने इनवेस्टमेंट बैंकों से प्रपोजल आमंत्रित किए थे। ये बैंकों को इस बंपर इश्यू में अहम भूमिका निभाने के लिए चुनने की प्रक्रिया थी। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सचेंज मार्च 2026 तक अपने IPO के लिए एडवाइजर का चयन करने की योजना बना रहा है।
NSE का IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा, जिसका मतलब है कि इसमें नए शेयर जारी नहीं होंगे। इस IPO का अनुमानित आकार 2.5 अरब डॉलर होने का अनुमान है। टेमासेक होल्डिंग्स और LIC जैसे बड़े निवेशक इस IPO में अपने शेयर बेच सकते हैं। मौजूदा शेयरधारकों को भी कंपनी की इक्विटी का 4% से 4.5% हिस्सा बेचने का मौका मिलेगा।
NSE ने स्पष्ट किया है कि जब वह पब्लिक होगा, तो अपने शेयर अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं करेगा। भारतीय नियमों के तहत, स्टॉक एक्सचेंजों को अपने प्लेटफॉर्म पर खुद को लिस्ट करने की अनुमति नहीं है, क्योंकि इससे कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट हो सकता है। NSE के CEO आशीष चौहान का कहना है कि यह कदम नियामकीय बाधाओं के कारण उठाया जा रहा है।
NSE का IPO मौजूदा शेयरधारकों को लिक्विडिटी प्रदान करने के लिए है, न कि नए फंड जुटाने के लिए। इसके अलावा, कंपनी अपने विकास योजना को पूरी तरह से पूरा करने के लिए पहले ही प्रॉफिट में है। NSE के लिए यह IPO एक बड़ी पहचान और अवसर लेकर आ सकता है।
नोट:- शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।