सुलतानपुर (उप्र), छह जुलाई (भाषा) उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर स्थित एक विशेष अदालत ने सोमवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मूल मामले की सुनवाई 18 जुलाई के लिए स्थगित कर दी।
सांसदों/विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई के लिए निर्धारित विशेष अदालत ने अब मानहानि के मुख्य मामले को 18 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
इससे पहले, अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-पंचम ने रायबरेली के सांसद के ख़िलाफ़ मानहानि मामले से जुड़े एक पुनरीक्षण याचिका पर एक जुलाई को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फ़ैसला 15 जुलाई तक के लिए सुरक्षित रख लिया था।
मिश्रा ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कथित तौर पर मानहानि वाली राहुल की टिप्पणियों से संबंधित सीडी में मौजूद आवाज़ का मिलान नेता प्रतिपक्ष की आवाज़ से करने के लिए फॉरेंसिक जांच का अनुरोध खारिज कर दिया गया था।
राहुल गांधी के अधिवक्ता काशी प्रसाद शुक्ला ने बताया कि मानहानि के मूल मामले में सुनवाई सोमवार को स्थगित कर दी गयी।
यह मामला 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों से जुड़ा है।
शुक्ला ने कहा कि अगर सत्र न्यायालय पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर देता है और वादी उच्च न्यायालय का रुख करता है, तब भी मुख्य मामले की सुनवाई में देरी हो सकती है, क्योंकि इस मामले से संबंधित रिकॉर्ड निचली अदालत के पास ही रहेंगे।
मिश्रा की ओर से वकील संतोष पांडे ने 21 मई को पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। इसमें निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें सबूत के तौर पर आवाज के नमूने देने की उनके अनुरोध को खारिज कर दिया गया था।
यह याचिका अभी अतिरिक्त जिला न्यायाधीश-पंचम की अदालत में लंबित है, जिसने अपना आदेश 15 जुलाई तक सुरक्षित रख लिया है।
मानहानि के अपने मुकदमे में, स्थानीय भाजपा नेता एवं जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष मिश्रा ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने 2018 के कर्नाटक चुनावों से पहले अमित शाह के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी की थी।
इस मामले की सुनवाई पिछले पांच सालों से चल रही है।
दिसंबर 2023 में, अदालत में पेश न होने पर राहुल गांधी के खिलाफ वारंट जारी किया गया था। फरवरी 2024 में उन्होंने आत्मसमर्पण किया और उन्हें जमानत मिल गई।
नेता प्रतिपक्ष ने जुलाई 2024 में अदालत के सामने अपना बयान दर्ज कराया, जिसमें उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया और इस मामले को राजनीतिक साज़िश करार दिया।
बाद में वादी के वकील ने राहुल गांधी के आवाज के नमूने की फॉरेंसिक जांच के निर्देश देने का अनुरोध किया, ताकि उसकी तुलना उस ऑडियो क्लिप से की जा सके जिसमें कथित तौर पर कांग्रेस नेता की शाह के ख़िलाफ़ टिप्पणी थी।
निचली अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया, जिसके बाद मिश्रा ने पुनरीक्षण याचिका दायर की।
भाषा सं जफर
राजकुमार सुरेश
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