काठमांडू, 27 मई (भाषा) नेपाल के राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने पिछले साल हुए ‘जेन जेड’ विरोध-प्रदर्शन के दौरान कथित मानवाधिकार उल्लंघन को लेकर, अपदस्थ प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली और कई वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की अनुशंसा की है।
स्वतंत्र और स्वायत्त संवैधानिक निकाय ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) के अध्यक्ष रबी लामिछाने को ओली के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बेदखल करने वाले हिंसक आंदोलन के दौरान ‘‘जेल से छुड़ाये जाने’’ को लेकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की।
बुधवार को सार्वजनिक की गई 29 पृष्ठ की रिपोर्ट में, आयोग ने ओली (जो सीपीएन-यूएमएल के अध्यक्ष भी हैं), तत्कालीन गृह मंत्री और नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक तथा पूर्व संचार मंत्री और यूएमएल नेता पृथ्वी सुब्बा गुरुंग के खिलाफ पिछले साल 8-9 सितंबर के विरोध-प्रदर्शनों में कथित मानवाधिकार उल्लंघन के लिए कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में 77 लोग मारे गए थे।
हालांकि, ऐसे अपराधों से निपटने के लिए विशिष्ट कानून नहीं होने को ध्यान में रखते हुए, आयोग ने सरकार से दोषियों पर मुकदमा चलाने के लिए नये कानून बनाने की सिफारिश की।
आयोग ने इन नेताओं को पांच साल तक राजनीतिक पदों के लिए चुनाव लड़ने से प्रतिबंधित करने और तीन साल के लिए उनकी विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाने की भी सिफारिश की।
सत्तारूढ़ सीपीएन (यूएमएल) सरकार को सत्ता से बेदखल करने वाले ‘जेन जेड’ के विरोध-प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई की जांच के लिए गठित जांच आयोग की रिपोर्ट के आधार पर, ओली और लेखक दोनों को मार्च में हत्या से संबंधित आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
हालांकि, मामला दर्ज करने के लिए अपर्याप्त आधार और सबूतों के अभाव के कारण, उन्हें अप्रैल में रिहा कर दिया गया था।
‘जेन जेड’ से तात्पर्य उन लोगों से है जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है।
एनएचआरसी की रिपोर्ट में आरएसपी प्रमुख लामिछाने की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें ‘‘जेल से छुड़ाया जाना’’ अनधिकृत और गैरकानूनी था।
उस समय आरएसपी नेता सहकारी धन के गबन के एक मामले में ललितपुर की नक्खु जेल में बंद थे।
एनएचआरसी ने पांच मार्च को हुए आम चुनावों में संसद के लिए चुने गए आरएसपी नेता मनीष झा और हरि ढकाल के खिलाफ गहन जांच की भी सिफारिश की।
आयोग ने पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के आचरण की भी जांच की मांग की, जिनपर ‘जेन जेड’ आंदोलन की कार्यकर्ता और समर्थक के रूप में काम करने का आरोप है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने नेपाल सेना को विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री कार्यालय, उच्चतम न्यायालय और राष्ट्रपति कार्यालय सहित प्रमुख सरकारी प्रतिष्ठानों को तोड़फोड़ और आगजनी से बचाने में विफल रहने के लिए जिम्मेदार ठहराया।
हालांकि, इसने सेना के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश नहीं की।
आयोग ने दोषी पाये जाने पर पूर्व गृह मंत्री सुधन गुरुंग सहित 15 आरएसपी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की भी सिफारिश की।
आयोग ने मौजूदा पुलिस महानिरीक्षक दान बहादुर कार्की (जो उस समय नेपाल पुलिस के अतिरिक्त महानिरीक्षक थे), सशस्त्र पुलिस बल के तत्कालीन अतिरिक्त महानिरीक्षक नारायण प्रसाद पौडेल, राष्ट्रीय जांच विभाग के पूर्व निदेशक कृष्णा खनाल और काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी छबी लाल रिजाल सहित कई वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की।
हालांकि, मानवाधिकार आयोग ने विरोध-प्रदर्शनों में काठमांडू महानगरपालिका के पूर्व महापौर और वर्तमान प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की भूमिका पर चुप्पी साध रखी है।
भाषा सुभाष सुरेश
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