(अदिति खन्ना)
लंदन, तीन जून (भाषा) ब्रिटेन में एक ब्रिटिश सिख को एक किशोर की हत्या के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद तब पुलिस के खिलाफ हिंसा भड़क गयी, जब कैमरे की फुटेज में नजर आया कि पुलिस अधिकारियों ने इस ब्रिटिश किशोर को नस्लवाद के आरोप में उसके अंतिम क्षणों में हथकड़ी पहनाई थी।
मंगलवार शाम साउथेम्प्टन में भारी भीड़ उमड़ी। ऐसे में हैम्पशायर और ‘इस्ले ऑफ वाइट पुलिस बल’ के अधिकारी दंगा रोधी उपकरणों से लैस होकर ब्रिटिश सिख विक्रम डिगवा के घर के पास तैनात थे। विक्रम डिगवा को 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की चाकू मारकर हत्या करने के अपराध में आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी है।
जब प्रदर्शनकारी प्रवास-विरोधी कार्यकर्ताओं के भाषण सुन रहे थे, तब पुलिसकर्मियों पर ईंटें और बोतलें फेंकी गईं। इन कार्यकर्ताओं ने तथाकथित ‘दोहरी पुलिस व्यवस्था’ अर्थात एक समुदाय की तुलना में अन्य को प्राथमिकता देने की आलोचना की।
वीडियो फुटेज में नजर आया कि पीडित हेनरी नोवाक की मृत्यु से कुछ ही क्षण पहले पुलिस ने उसे हथकड़ी पहनायी थी। उसकी मृत्यु पिछले साल दिसंबर माह में हुई थी।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री केअर स्टार्मर ने बुधवार को ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में कहा, ‘कई गंभीर सवालों के जवाब बाकी हैं, जिनमें यह भी शामिल है कि नस्लवाद के आरोपों ने पुलिस की सोच को कैसे प्रभावित किया और हम आईओपीसी (स्वतंत्र पुलिस आचरण कार्यालय) को इस घटना की तह तक पहुंचने में सहयोग कर रहे हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन चाहे हमें कितना भी दर्द क्यों न हो, हिंसा और अव्यवस्था को और बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। कल रात साउथेम्प्टन में पुलिस अधिकारियों पर हुए हमले शर्मनाक और पूरी तरह अस्वीकार्य हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह क्रोध करने का नहीं, बल्कि गंभीर कार्य करने का समय है। और मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अव्यवस्था फैलाने में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दी जाएगी, जैसा कि हमने पहले भी किया है।’’
हैम्पशायर पुलिस के मुख्य कांस्टेबल एलेक्सिस बून ने कहा कि झड़पों के दौरान 11 पुलिस अधिकारी और एक पुलिस कुत्ता घायल हो गए, जिसके बाद समाज में ‘भय और विभाजन’ की स्थिति पैदा हो गई।
ब्रिटेन की गृह मंत्री शबाना महमूद ने कहा, ‘‘इस त्रासदी का फायदा उठाकर हिंसा और अव्यवस्था फैलाने का कोई औचित्य नहीं है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों को कानूनन कड़ी सजा भुगतनी पड़ेगी।’’
ऐसी चिंताएं हैं कि ‘रिफॉर्म यूके’ और ‘रिस्टोर ब्रिटेन’ जैसे धुर दक्षिणपंथी संगठन इस माह के अंत में उत्तरी इंग्लैंड के मेकरफील्ड में होने वाले एक महत्वपूर्ण उपचुनाव में चुनावी लाभ के लिए इस मुद्दे को लपक रहे हैं।
इस मुकदमे ने सिख समुदाय को धार्मिक कटार या कृपाण रखने की कानूनी अनुमति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि दिगवा ने अदालत में तर्क दिया था कि उसने धार्मिक कारणों से अपने पास रखे 21 सेंटीमीटर लंबे चाकू का आत्मरक्षार्थ इस्तेमाल किया था।
साउथेम्प्टन क्राउन अदालत में इस सप्ताह के प्रारंभ में अपने फैसले में न्यायाधीश विलियम मौसली ने कहा कि वह सिखों के निहंग संप्रदाय से संबंधित था, जिसकी परंपरा है कि वे एक दूसरा चाकू रखते हैं जो अक्सर पूरी तरह से दिखाई देता है।
अदालत में यह बात सामने आने के बाद कि दिगवा ने पिछले दिसंबर में हुई घटना के दौरान नस्ली धमकी मिलने के बारे में झूठ बोला था, कई ब्रिटिश सिख संगठनों और संसद सदस्यों ने उसके परिवार के साथ एकजुटता दिखायी और कृपाण को अनुचित रूप से निशाना बनाए जाने के खिलाफ आवाज उठाई है।
ब्रिटिश सिख सर्वदलीय संसदीय समूह (एपीपीजी) के एक संयुक्त बयान में कहा गया है, “यह मामला विक्रम दिगवा द्वारा हेनरी नोवाक की हत्या से संबंधित है। यह धर्म या नस्लवाद से जुड़ा नहीं है। यह एक व्यक्ति का आपराधिक कृत्य था, जिसके कार्यों के लिए वह स्वयं जिम्मेदार है।”
उनमें से कई लोगों ने मंगलवार को ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ में चर्चा में भी भाग लिया, जिसके दौरान महमूद ने एक बयान दिया जिसमें उन्होंने ब्रिटेन के 2019 के आक्रामक हथियार अधिनियम के तहत सिख धर्म की पांच पवित्र वस्तुओं में से एक के रूप में कृपाण से संबंधित कानूनी सुरक्षा पर प्रकाश डाला।
दिगवा की मां 53 वर्षीय किरण कौर पिछले साल चार दिसंबर की सुबह दक्षिण-पूर्वी इंग्लैंड के पोर्ट्सवुड में अपराध स्थल से हत्या में प्रयुक्त हथियार को हटाने में अपनी भूमिका के कारण जेल में हैं और उन्हें 17 जुलाई को सजा सुनाई जाएगी।
इस बीच, उसके पिता, 52 वर्षीय मोगा सिंह और बड़े भाई गुरप्रीत दिगवा (27), मंगलवार को साउथेम्प्टन मजिस्ट्रेट अदालत में पेश होने के बाद जमानत पर रिहा हो गए।
भाषा राजकुमार माधव
माधव