नामांकन शुरू होने से एक दिन पहले बिहार में चुनावी जंग तेज

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नामांकन शुरू होने से एक दिन पहले बिहार में चुनावी जंग तेज

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  • Publish Date - October 9, 2025 / 10:46 PM IST,
    Updated On - October 9, 2025 / 10:46 PM IST

पटना, नौ अक्टूबर (भाषा) बिहार विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को सियासी पारा चढ़ गया।

एक ओर कांग्रेस ने सत्तारूढ़ राजग सरकार के खिलाफ “आरोपपत्र” जारी कर हमला बोला, तो दूसरी ओर राजद नेता तेजस्वी यादव ने हर परिवार को सरकारी नौकरी देने का नया वादा किया।

प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।

पूर्व राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 51 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें एक उम्मीदवार तृतीय लिंगी समुदाय से है और उसे आरक्षित सीट से टिकट दिया गया है।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय सिंह ने कहा, “अगली सूची एक-दो दिन में जारी की जाएगी।” हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रशांत किशोर खुद चुनाव मैदान में उतरेंगे या नहीं।

किशोर ने पहले कहा था कि अगर वह चुनाव लड़ेंगे तो उनकी सीट या तो उनका जन्मस्थान कारगहर होगी, जहां से पार्टी ने भोजपुरी गायक रितेश पांडेय को टिकट दिया है, या फिर राघोपुर जो तेजस्वी यादव का गढ़ है और जहां से अब तक उम्मीदवार की घोषणा नहीं की गई है।

उदय सिंह ने कहा, “किशोर 11 अक्टूबर से राघोपुर से प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। वह खुद उम्मीदवार होंगे या नहीं, यह समय के साथ स्पष्ट होगा।”

इधर, तेजस्वी यादव ने यहां पत्रकारों से कहा कि अगर बिहार में महागठबंधन (इंडिया गठबंधन) की सरकार बनती है, “तो हम 20 दिनों के भीतर ऐसा कानून लाएंगे जिससे 20 महीने में हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी मिले।”

तेजस्वी ने कहा कि उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने 2020 के चुनाव में किए गए 10 लाख नौकरियों के वादे को आधा पूरा कर दिखाया था, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रोजगार सृजन के मोर्चे पर असफल रहे हैं।

उनके इस ऐलान का कांग्रेस ने स्वागत किया। कांग्रेस विधायक दल के नेता शकील अहमद खान ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, “यह केवल राजद का वादा नहीं समझा जाना चाहिए। रोजगार सृजन बिहार की सबसे बड़ी जरूरत है और तेजस्वी यादव ने गंभीरता दिखाई है।”

हालांकि, जदयू के विधानपरिषद सदस्य और प्रवक्ता नीरज कुमार ने इस वादे को “संविधान-विरोधी” बताया।

उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव को जातीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट देखनी चाहिए, जिसके अनुसार बिहार में 2.76 करोड़ परिवार हैं। नीतीश कुमार के शासन में ही 50 लाख लोगों को नौकरी मिली है, वो भी योग्यता के आधार पर। संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिसके तहत तेजस्वी जैसा कानून बनाया जा सके।”

इस बीच, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल और अधीर रंजन चौधरी पटना पहुंचे और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के खिलाफ 42 पन्नों की ‘आरोपपत्र’ जारी की।

“बीस साल विनाश काल” शीर्षक वाले इस दस्तावेज में आरोप लगाया गया कि पिछले 20 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत गठबंधन ने “दिल्ली और नागपुर से रिमोट कंट्रोल के जरिए” बिहार को विकास की दृष्टि से पीछे धकेल दिया एवं राज्य को अपराध तथा भ्रष्टाचार में शीर्ष पर पहुंचा दिया।

वहीं, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने सीट बंटवारे को लेकर मतभेदों की बात खारिज करते हुए कहा, “सभी घटक दलों के शीर्ष नेता आपस में लगातार संपर्क में हैं। अंतिम निर्णय बिहार में नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर पर होगा। दो-तीन दिनों में सब कुछ स्पष्ट कर दिया जाएगा।”

दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि पार्टी ने अपने उम्मीदवारों की सूची “सहयोगी दलों से परामर्श के बाद” तैयार कर ली है। उन्होंने उम्मीद जताई कि “ एक-दो दिन में इंडिया गठबंधन सीट बंटवारे का फार्मूला घोषित करेगा। इस गठबंधन में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो)और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) जैसे नए दलों को भी शामिल किया जा रहा है। ”

इधर लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की एक आपात बैठक यहां प्रदेश मुख्यालय में जमुई के सांसद और बिहार प्रभारी अरुण भारती की अध्यक्षता में हुई ,जिसमें पार्टी पदाधिकारियों ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को सभी तरह का निर्णय लेने के लिए अधिकृत कर दिया।

भाषा कैलाश

राजकुमार

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