Naxalite Gold Reserve Seized: नकदी रकम को ‘गोल्ड’ में रिजर्व कर रहे थे नक्सली.. पुलिस ने खोला माओवादियों के ‘काली कमाई’ का कच्चा चिट्ठा, आप भी पढ़ें

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Naxalite Gold Reserve Seized Chhattisgarh: जगदलपुर में नक्सलियों के डंप से 3.61 करोड़ नकद और 1 किलो सोना बरामद, वसूली और हथियारों का खुलासा।

  • Reported By: Naresh Mishra

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  • Publish Date - March 16, 2026 / 01:43 PM IST,
    Updated On - March 16, 2026 / 01:48 PM IST

Naxalite Gold Reserve Seized || Image- IBC24 News File

HIGHLIGHTS
  • नक्सलियों के डंप से 3.61 करोड़ नकद बरामद
  • 1 किलो सोना भी सुरक्षा बलों ने कब्जा किया
  • ग्रामीणों से वसूली कर जुटाई जाती थी रकम

Naxalite Gold Reserve Seized: जगदलपुर: बीते 11 मार्च को जगदलपुर में 108 नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण के बाद करोड़ों रुपये नकद मिलने का खुलासा आईजी बस्तर ने किया है। नक्सलियों के डंप से मिला यह कैश मुख्य रूप से बीजापुर जिले से बरामद किया गया था। सुरक्षा बलों ने जमीन में दबाकर रखे गए 3 करोड़ 61 लाख रुपये नकद और 1 किलो सोना भी बरामद किया है।

ग्रामीणों से वसूली कर जुटाया जाता था पैसा

आईजी बस्तर ने बताया कि नक्सलियों के पास जो करोड़ों रुपये मिले हैं, वह ग्रामीणों से टैक्स के रूप में वसूले गए थे। इस रकम का इस्तेमाल संगठन के विस्तार और इसे बड़े नक्सली नेताओं तक पहुंचाने के लिए किया जाता था। इसके अलावा तेंदूपत्ता लेवी और ग्रामीणों से साइकिल से लेकर मोटरसाइकिल तक के नाम पर भी पैसा वसूला जाता था।

हथियार और संसाधन जुटाने में होता था उपयोग

Naxalite Gold Reserve Seized: नक्सली इन पैसों का इस्तेमाल हथियार खरीदने और अन्य संसाधन जुटाने में करते थे। बरामद नकदी के बारे में यह भी सामने आया है कि इसका कुछ हिस्सा पड़ोसी राज्यों में सोने में बदलकर रखा गया था, ताकि जरूरत पड़ने पर संगठन को आगे बढ़ाने में इसका इस्तेमाल किया जा सके।

जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां

आईजी बस्तर के अनुसार नक्सलियों के पास कोई स्थायी आर्थिक स्रोत नहीं होता है। ऐसे में वे अंदरूनी इलाकों में काम करने वाली एजेंसियों और ग्रामीणों से जबरन वसूली करते थे। अब इस करोड़ों रुपये की बरामदगी के मामले में सुरक्षा एजेंसियां और भी जानकारी जुटाने में लगी हुई हैं।

ओड़िशा में नक्सलियों का आत्मसमर्पण

Naxalite Gold Reserve Seized: ओडिशा के कालाहांडी जिले में रविवार को 11 माओवादियों ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इन सभी ने भवानिपटना रिजर्व पुलिस ग्राउंड में हथियार डाल दिए। इस दौरान ओडिशा के डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया मौजूद रहे। आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी बंसाधारा-गुमुसर-नागबली (BGN) डिवीजन से जुड़े हुए थे। इसे ओडिशा पुलिस के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।

मीडिया से बातचीत में डीजीपी योगेश बहादुर खुरानिया ने बताया कि बंसाधारा-गुमुसर-नागबली डिवीजन अब लगभग समाप्त हो चुका है। अब केवल करीब 15 माओवादी ही बचे हैं, जो कंधमाल, रायगढ़ा और कालाहांडी के ट्राई-जंक्शन इलाके में सक्रिय हैं। उन्होंने इन बचे हुए माओवादियों से भी सरकार की नई पुनर्वास योजना के तहत आत्मसमर्पण करने की अपील की और भरोसा दिलाया कि उन्हें पूरी सहायता दी जाएगी।

ओड़िशा के दो जिले नक्सल मुक्त

Naxalite Gold Reserve Seized: इससे पहले 2 मार्च को डीजीपी खुरानिया ने बोलांगीर और बरगढ़ जिलों को नक्सल मुक्त घोषित किया था। उन्होंने बताया कि लंबे समय से चल रहे संयुक्त अभियान, सटीक खुफिया जानकारी, केंद्र और राज्य की सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय और स्थानीय लोगों के सहयोग से इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों को पूरी तरह खत्म किया जा सका है।

उन्होंने कहा कि यह बड़ी सफलता पुलिस बल के साहस, संयम और समर्पण के कारण संभव हो पाई है। साथ ही उन्होंने अभियान में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों को बधाई दी और जनता के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। डीजीपी ने यह भी कहा कि राज्य के अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी इसी तरह के अभियान जारी रहेंगे, ताकि जल्द से जल्द नक्सल समस्या को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में ओडिशा के कंधमाल जिले में एक बड़े अभियान में 6 नक्सली मारे गए थे। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ बड़ी सफलता बताया था। उन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Q1. बस्तर में नक्सलियों के पास से कितनी रकम और सोना बरामद हुआ?

उत्तर: नक्सलियों के डंप से 3 करोड़ 61 लाख रुपये नकद और 1 किलो सोना बरामद हुआ।

Q2. नक्सलियों ने यह पैसा कैसे जुटाया था?

उत्तर: ग्रामीणों से टैक्स, तेंदूपत्ता लेवी और जबरन वसूली के जरिए यह पैसा जुटाया गया।

Q3. बरामद रकम का नक्सल संगठन में क्या उपयोग होता था?

उत्तर: इसका इस्तेमाल हथियार खरीदने, संसाधन जुटाने और संगठन विस्तार में किया जाता था।