कोलकाता: West Bengal News पश्चिम बंगाल सरकार ने शनिवार को पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग कर दिया और महिला पुलिसकर्मियों को उनके गृह जिलों में तैनात करने का निर्णय भी किया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस कल्याण बोर्ड को भंग करने के संबंध में कहा कि यह संस्था एक ‘‘राजनीतिक दल के मुखौटे वाली संस्था’’ में बदल गई थी और इसका इस्तेमाल कुछ व्यक्तियों को सेवा का ‘‘अवैध विस्तार’’ देने के लिए किया जा रहा था। दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर में प्रशासनिक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर हमले किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और कानून-व्यवस्था सख्ती से लागू की जाएगी। शुभेंदु ने पुलिसिंग और प्रशासन पर अपनी सरकार का रुख रेखांकित करते हुए कहा, ‘‘पहले शासकों का कानून था; अब कानून का शासन है।’’
West Bengal News उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस कल्याण बोर्ड का गठन नेक इरादे से किया गया था। लेकिन अंततः यह एक पार्टी का मुखौटा संगठन बन गया। मुझे नहीं पता कि इससे पुलिसकर्मियों के कल्याण में क्या लाभ हुआ, लेकिन यह अवैध रूप से (नौकरी की अवधि बढ़ाने का) अड्डा बन गया। कुछ लोगों को व्यक्तिगत रूप से इसका फायदा मिला है। आज हम इस बोर्ड को भंग कर रहे हैं।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि बोर्ड को भंग करने का आधिकारिक आदेश सोमवार को जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों और संगठनों से परामर्श के बाद तीन महीने के भीतर एक नयी कल्याणकारी व्यवस्था का गठन किया जाएगा।उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति कैबिनेट की मंजूरी के लिए प्रस्ताव तैयार करेगी।
शुभेंदु ने आरोप लगाया कि हाल के वर्षों में पुलिस प्रशासन ‘‘भय के माहौल’’ में काम कर रहा था और अनुशासन प्रभावित हुआ। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘कोई व्यवस्था नहीं थी। एक सांसद का पीए ओसी और आईसी को निर्देश देता था और कार्रवाई की जाती थी। एसपी को कुछ कार्रवाइयों के बारे में एक दिन बाद ही पता चलता था।’’ मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों को पिछले पांच वर्षों में कथित तौर पर राजनीतिक उत्पीड़न, हिरासत में यातना या जबरन वसूली का सामना करना पड़ा है, वे पुलिस के समक्ष नयी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। शुभेंदु ने कहा कि अवैध हिरासत, हिरासत में यातना, महिलाओं के उत्पीड़न और सरकारी योजनाओं के लिए कथित तौर पर ‘‘कट मनी’’ के भुगतान से संबंधित शिकायतों की जांच की जाएगी।
उन्होंने पुलिस को बांग्लादेश के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के नदी क्षेत्रों से होने वाली घुसपैठ के खिलाफ सतर्क रहने को कहा और अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का निर्देश दिया। शुभेंदु ने जबरन वसूली के खिलाफ अपनी सरकार का रुख दोहराते हुए कहा कि ऑटो-रिक्शा और टोटो (ई-रिक्शा) चालकों से अवैध धन की वसूली तुरंत बंद होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘अब से कोई भी ‘कट मनी’ या अवैध ‘टोल’ का भुगतान नहीं करेगा।’’ मुख्यमंत्री ने पुलिस को शिकायतों पर कार्रवाई करने और जबरन वसूली गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने यह भी घोषणा की कि कल्याणकारी उपाय के तहत महिला पुलिसकर्मियों को यथासंभव उनके गृह जिलों में या उसके आसपास तैनात किया जाएगा। शुभेंदु ने कहा, “हमारे पास महिला पुलिस अधिकारी और कांस्टेबल हैं। मैंने डीजीपी से अनुरोध किया है कि उन्हें उनके घर से दूर और पड़ोसी जिलों में स्थानांतरित न किया जाए। यह एक कल्याणकारी कदम है। सामान्य तौर पर, अलीपुरद्वार से एक महिला पुलिसकर्मी का तबादला उत्तर दिनाजपुर या सिलीगुड़ी में किया जा सकता है, लेकिन पुरुलिया या बांकुड़ा में नहीं।” उन्होंने कहा, ‘‘डीजीपी और गृह सचिव को एक प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है ताकि जिन लोगों ने 15 वर्ष से अधिक की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके गृह जिलों के करीब स्थानांतरित किया जा सके।’’
आसनसोल में शुक्रवार रात हुई हिंसा की घटनाओं का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा कि पुलिस चौकी पर हुए हमलों के सिलसिले में 15 लोग गिरफ्तार किए गए हैं और क्षतिग्रस्त सार्वजनिक संपत्ति की कीमत आरोपियों से वसूल की जाएगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस को अवैध बूचड़खानों, ध्वनि प्रदूषण, अनधिकृत टोल वसूली और अवैध रेत एवं कोयला खनन से संबंधित हालिया सरकारी आदेशों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया, साथ ही यह सुनिश्चित करने को भी कहा कि प्रवर्तन उपाय शांतिपूर्ण ढंग से और उचित जनसंचार के बाद किए जाएं।