दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए हजारों फ्लैट की स्थिति पर चिंता जताई

दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए हजारों फ्लैट की स्थिति पर चिंता जताई

दिल्ली उच्च न्यायालय ने जेएनएनयूआरएम के तहत बनाए गए हजारों फ्लैट की स्थिति पर चिंता जताई
Modified Date: July 30, 2026 / 10:31 pm IST
Published Date: July 30, 2026 10:31 pm IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत करीब 2,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाए गए हजारों फ्लैट की ‘‘रहने लायक नहीं’’ स्थिति पर बृहस्पतिवार को गंभीर चिंता जताई।

मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि जेएनएनयूआरएम का उद्देश्य गरीबी उन्मूलन था, लेकिन दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) को सुपुर्द द्वारका की सात परियोजनाओं में से तीन में विशेष मरम्मत कार्य की आवश्यकता है।

वर्ष 2009-10 में केंद्र और दिल्ली सरकार की वित्तीय सहायता से शुरू जेएनएनयूआरएम के तहत डीयूएसआईबी और दिल्ली राज्य औद्योगिक और आधारभूत संरचना विकास निगम लिमिटेड (डीएसआईआईडीसी) को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए 52,344 फ्लैट बनाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

वस्तु स्थिति रिपोर्ट में डीयूएसआईबी ने बताया कि जहांगीरपुरी और सुल्तानपुरी स्थित उसकी परियोजनाओं के फ्लैट भी अब तक खाली पड़े हैं। वहीं, इस योजना के तहत डीएसआईआईडीसी को सौंपी गई सभी 11 परियोजनाओं के फ्लैट भी रहने लायक नहीं हैं।

डीयूएसआईबी के वकील ने अदालत को बताया कि कई कारणों से इन फ्लैट का आवंटन नहीं किया जा सका, जिनमें उनकी जर्जर हो चुकी स्थिति भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कुछ मकानों का निर्माण पूरा नहीं हो सका, जबकि कई लोग उन स्थानों पर जाकर रहने के इच्छुक भी नहीं थे।

पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘जेएनएनयूआरएम योजना पर 2,000 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2,000 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन अब तक लोगों को फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया। हम केवल अपनी चिंता जता रहे हैं। जेएनएनयूआरएम गरीबी उन्मूलन की योजना थी। क्या गरीबी दूर करने का यही तरीका है?’’

अदालत ने अधिकारियों से सवाल किया कि क्या उन्हें पहले से यह अंदाजा नहीं था कि इन फ्लैट के खरीदार या लाभार्थी नहीं मिलेंगे। पीठ ने कहा, ‘‘क्या आपको करदाताओं के 2,000 करोड़ रुपये इस तरह बर्बाद करने की अनुमति दी जा सकती है?’’

पीठ ने कहा, ‘आप लोगों ने सरकारी खजाने से 2,000 करोड़ रुपये खर्च कर दिए, लेकिन एक भी फ्लैट में कोई रहने वाला नहीं है।’’

द्वारका परियोजना के संबंध में डीयूएसआईबी के वकील ने बताया कि मरम्मत कार्य कराने के लिए निविदा (टेंडर) पहले ही जारी की जा चुकी है।

इस पर पीठ ने कहा, ‘‘आपने मकान बनाए और अब कह रहे हैं कि वे रहने लायक नहीं हैं तथा उनमें विशेष मरम्मत की जरूरत है। अब मरम्मत के लिए फिर 2,000 करोड़ रुपये चाहिए। आखिर यह सब क्या हो रहा है?’’

अदालत ने ये टिप्पणियां भाई राम कैंप, डीआईडी कैंप और मस्जिद कैंप के कुछ निवासियों की अपील पर सुनवाई के दौरान कीं। इन अपील में एकल न्यायाधीश के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास वाले क्षेत्र से उन्हें हटाए जाने की कार्रवाई में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया गया था।

अपीलकर्ताओं ने उन्हें सावदा घेवरा में प्रस्तावित पुनर्वास का विरोध करते हुए कहा कि वहां स्कूल, बिजली और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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