वंदे मातरम् विधेयक संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ: विपक्ष
वंदे मातरम् विधेयक संविधान और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ: विपक्ष
नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) विपक्षी दलों के नेताओं ने संसद से पारित वंदे मातरम् विधेयक की आलोचना करते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि यह संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत है तथा यह नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) की सांसद कनिमोई ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस विधेयक का विरोध किया क्योंकि यह समाज में ध्रुवीकरण पैदा करने का प्रयास है।
उन्होंने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, ‘‘वंदे मातरम् विधेयक हमारे देश की धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है। हमारे संविधान निर्माताओं ने स्पष्ट किया था कि केवल पहले दो अंतरे ही गाए जाएंगे। अब सरकार पूरे गीत का गायन करने पर जोर दे रही है। इससे विभिन्न धर्मों के लोगों की भावनाएं आहत होंगी। सरकार इस विधेयक के जरिए देश में ध्रुवीकरण और विभाजन करना चाहती है।’’
द्रमुक के सांसद ए. राजा ने कहा कि उन्होंने संशोधन प्रस्ताव देकर मांग की थी कि 24 जनवरी, 1950 को संविधान सभा द्वारा जो स्वीकार किया गया था, केवल उसी को कानून का हिस्सा बनाया जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने विधेयक में यह कहकर ‘‘धोखा’’ किया है कि संविधान सभा ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की पूरी रचना को मंजूरी दी थी।
राजा ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जैसे नेताओं की भी यही सहमति थी कि केवल पहले दो अंतरों का ही उपयोग किया जाए।
तृणमूल कांग्रेस के नेता सौगत रॉय ने इस विधेयक को अनावश्यक बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विधेयक की कोई आवश्यकता नहीं थी। हमें ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन रवींद्रनाथ ठाकुर नहीं चाहते थे कि पूरा ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत बने। ये लोग ठाकुर से भी आगे निकल गए हैं।’’
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह विधेयक संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है।
उन्होंने कहा, ‘‘वंदे मातरम् में देवी-देवताओं की वंदना है और यह संविधान के अनुच्छेद 25, 26 और 29 का उल्लंघन करता है। ‘जन गण मन’ का गायन करते समय राष्ट्र की छवि सामने आती है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ एक प्रार्थना है। मैं मुसलमान हूं और अल्लाह के सिवा किसी की इबादत नहीं करता। यह अनुच्छेद 25 का गंभीर उल्लंघन है।’’
ओवैसी ने यह भी दावा किया कि संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत घोषित करने संबंधी कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक भारत को ‘‘हिंदू धर्मतांत्रिक देश’’ बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है।
कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का अभिन्न हिस्सा है और देशभक्ति का प्रतीक है, लेकिन इसे राजनीति का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, “मेरे दिवंगत दादा चौधरी रणबीर सिंह को ‘वंदे मातरम्’ गाने के कारण अंग्रेजों ने जेल में डाल दिया था। इसमें कोई संदेह नहीं कि यह देशभक्ति का प्रतीक है, लेकिन यह किसी राजनीतिक दल का प्रतीक नहीं है। इस मुद्दे का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए।’’
उल्लेखनीय है कि संसद ने बृहस्पतिवार को ‘वंदे मातरम्’ का अपमान दंडनीय अपराध बनाने संबंधी राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया। लोकसभा ने बृहस्पतिवार को मंजूरी दी, जबकि उच्च सदन में यह विधेयक पारित हुआ था।
भाषा हक प्रशांत
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