अहमदाबाद, 24 जनवरी (भाषा) गुजरात में पाटन जिले के एक सरकारी विश्वविद्यालय ने अंग्रेजी विभाग के प्रमुख पद पर रसायन विज्ञान प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर उठे विवाद और गुजरात उच्च न्यायालय में दायर मुकदमों के बाद अपना फैसला पलट दिया है। विश्वविद्यालय ने अब उस पद पर संबंधित विषय और शाखा के व्यक्ति को ही प्रभारी नियुक्त करने पर सहमति जताई है।
हेमचंद्राचार्य उत्तर गुजरात विश्वविद्यालय ने शुक्रवार को न्यायमूर्ति निरजर देसाई की अदालत को बताया कि उसने पूरे विवाद पर पुनर्विचार किया है और अब अंग्रेज़ी विभाग के प्रभारी अध्यक्ष (इंचार्ज-एचओडी) के रूप में उसी शाखा एवं विषय के व्यक्ति को नियुक्त करने के लिए तैयार है।
पूर्व विभागाध्यक्ष आदेश पाल के सेवानिवृत्त होने के बाद विश्वविद्यालय ने कोकिलाबेन परमार, जो कि रसायन विज्ञान की प्रोफेसर हैं, को अंग्रेज़ी विभाग का प्रभारी एचओडी नियुक्त किया था। इसी को लेकर विश्वविद्यालय विवादों में घिर गया और कई मुकदमे दायर हुए।
इस नियुक्ति को अंग्रेज़ी विभाग की ही एक अन्य प्रोफेसर हेतल पटेल ने शिक्षा न्यायाधिकरण में चुनौती दी थी।
विश्वविद्यालय ने न्यायाधिकरण के समक्ष अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि अंग्रेज़ी विभाग में वरिष्ठता अभी तय नहीं हुई है और प्रभारी एचओडी को केवल प्रशासनिक कार्य सौंपे गए हैं।
हालांकि, न्यायाधिकरण ने 10 अक्टूबर 2025 के अंतरिम आदेश में विश्वविद्यालय के फैसले पर रोक लगा दी और परमार को अंग्रेज़ी विभाग में कार्य करने से रोक दिया। इसके बाद परमार ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया कि पक्षकार होने के बावजूद उन्हें सुना नहीं गया।
उनकी याचिका पर विचार करते हुए उच्च न्यायालय ने 16 अक्टूबर को न्यायाधिकरण के अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी और परमार की नियुक्ति के संबंध में जुलाई में जारी विश्वविद्यालय के आदेश को बहाल कर दिया।
शुक्रवार को विश्वविद्यालय ने अदालत को बताया कि वह उसी शाखा और विषय के व्यक्ति को प्रभारी एचओडी नियुक्त करने के लिए तैयार है। इसके बाद अदालत ने न्यायाधिकरण के आदेश पर लगी अंतरिम रोक हटाते हुए विश्वविद्यालय के इस निर्णय को स्वीकार कर लिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि नियुक्ति को चुनौती देने वाली प्रोफेसर हेतल पटेल को भविष्य में विश्वविद्यालय द्वारा की जाने वाली किसी अन्य नियुक्ति से आपत्ति हो, तो वह कानून के अनुसार उपयुक्त प्राधिकरण के समक्ष उसे चुनौती दे सकती हैं।
भाषा गोला नेत्रपाल
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