नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) संसद की शिक्षा संबंधी स्थायी समिति के सदस्यों ने बुधवार को राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को वैधानिक दर्जा देने की मांग की और मेडिकल प्रवेश से संबंधित नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के सफल आयोजन की भी सराहना की।
हालांकि, समिति के सदस्यों ने अगले वर्ष से नीट-यूजी परीक्षा को कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) प्रणाली के माध्यम से आयोजित किए जाने पर चिंता जताई और कहा कि इस संबंध में समाज के वंचित वर्गों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
सरकार द्वारा परीक्षा प्रणाली में सुधार के सुझाव देने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के अध्यक्ष और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व अध्यक्ष आर. राधाकृष्णन ने संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति के समक्ष नीट पुनर्परीक्षा के लिए उठाए गए कदमों पर चर्चा की।
एनटीए के महानिदेशक अभिषेक सिंह और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी भी समिति के समक्ष उपस्थित हुए और 21 जून को आयोजित नीट पुनर्परीक्षा से मिले अनुभवों पर चर्चा की।
कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली समिति ने अधिकारियों को नीट-यूजी पुनर्परीक्षा से मिली सीख, एनटीए को मजबूत बनाने के उपायों और आवश्यक सुधारों पर चर्चा के लिए तलब किया था।
वासनिक की अध्यक्षता में यह समिति की पहली बैठक थी। इससे पहले कांग्रेस के दिग्विजय सिंह समिति के अध्यक्ष थे, जिनका बीते 21 जून को राज्यसभा सदस्य का कार्यकाल समाप्त हो गया।
समिति ने नीट-यूजी पुनर्परीक्षा के आयोजन की समीक्षा की और अभिषेक सिंह ने सदस्यों को परीक्षा प्रक्रिया और उसके परिणामों की जानकारी दी।
सूत्रों के अनुसार, समिति के सदस्यों ने अधिकारियों से पूछा कि अगले वर्ष एनटीए इतने बड़े पैमाने की परीक्षा अपने दम पर कैसे आयोजित करेगा, जबकि पुनर्परीक्षा का सफल आयोजन तभी संभव हो सका, जब पूरा सरकारी तंत्र सक्रिय था।
सदस्यों ने कहा कि प्रधानमंत्री से लेकर कनिष्ठ अधिकारी तक सभी इस परीक्षा के आयोजन में शामिल थे।
सूत्रों के मुताबिक, सांसदों ने सुझाव दिया कि इतने बड़े स्तर की परीक्षा का स्वतंत्र रूप से संचालन करने के लिए एनटीए को अधिक अधिकार दिए जाएं और एजेंसी को वैधानिक दर्जा प्रदान किया जाए।
शिक्षा मंत्रालय ने एनटीए की स्थापना सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक स्वतंत्र, स्वायत्त और आत्मनिर्भर प्रमुख परीक्षा संगठन के रूप में की थी।
समिति के सदस्यों ने परीक्षा केंद्रों पर देर से पहुंचने के कारण कई अभ्यर्थियों के परीक्षा से वंचित रह जाने पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने एनटीए से ऐसे अभ्यर्थियों की मदद के लिए कदम उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि देर से पहुंचने के कारण केंद्र के बाहर रह गए परेशान अभ्यर्थियों से जुड़े वीडियो देखकर चिंता हुई।
एनटीए द्वारा अब नीट परीक्षा को कंप्यूटर आधारित प्रारूप में आयोजित करने का निर्णय लिए जाने के बाद सदस्यों ने कहा कि वंचित वर्गों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि उनमें से कुछ के पास कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकती।
इससे पहले शीर्ष अधिकारियों ने समिति को 21 जून को आयोजित नीट पुनर्परीक्षा के सफल आयोजन और इसके लिए उठाए गए विभिन्न कदमों की जानकारी दी। समिति ने उनके प्रयासों के लिए उन्हें बधाई दी।
कुछ सांसदों ने यह भी पूछा कि परीक्षार्थियों की संख्या कम करने के लिए नर्सिंग और अन्य पाठ्यक्रमों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं क्यों नहीं आयोजित की जातीं।
राधाकृष्णन ने समिति को बताया कि उनकी ओर से दी गई सिफारिशों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। हालांकि, इन सिफारिशों को लागू करने की समयसीमा के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई।
सूत्रों ने बताया कि कुछ सदस्यों ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी परीक्षाएं संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर चरणबद्ध तरीके से आयोजित की जा सकती हैं।
बीते तीन मई को आयोजित नीट-यूजी परीक्षा को ‘प्रश्नपत्र लीक’ की खबरों के बाद सरकार ने रद्द कर दिया था और 21 जून को पुनर्परीक्षा आयोजित की गई। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) नीट प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच कर रहा है।
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